मेदनीचौकी. प्रखंड के गरखै नदी का पानी इन दिनों जमा होने के कारण सड़ गया है. इसमें जलकुंभी भरा है. पानी नहीं दिखता. काले पानी से दुर्गंध आती है. यह नदी प्रखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर दक्षिण गोंदरी पुल के समीप किऊल नदी से कटती है और लगभग 30 किलोमीटर की टेढ़ी-मेढ़ी यात्रा करती हुई खगौर के समीप पुन: किऊल नदी में समा जाती है. गरखै नदी में प्रवेश द्वार और निकास द्वार दोनों अवरुद्ध कर दिया गया है. डकरा नाला व हैवतगंज नहर परियोजना को लेकर गरखै नदी में अब बाढ़ नहीं आती है. लेकिन इलाका समस्याओं से पटा है. नदी होने के बाद भी पानी की किल्लत है. पहले तो इस नदी का पानी आदमी व मवेशी सब पिया करते थे, लेकिन अब पीने की बात तो दूर रही लोग कपड़ा तक नहीं धोते हैं. माणिकपुर बहियार में इन दिनों जमुई क्षेत्र के चरवाहे सैकड़ों की तादाद में मवेशी के साथ आये हुए हैं. मवेशी को 5 किलोमीटर दूर किऊल नदी में जाकर पानी पिलाते हैं. सड़क पर बहाते हैं गंदा पानी, लोगों में आक्रोशमेदनीचौकी. प्रखंड मुख्यालय के सरस्वती धर्मशाला में बरात आयी थी. भोज का गंदा सड़ा हुआ पानी सूर्यगढ़ा-सलेमपुर पथ पर बहाने से राहगीरों की परेशानी बढ़ गयी है. दुर्गंध से राजा बाजार के दुकानदार व ग्राहक परेशान हैं. बदबू से संक्रामक बीमारी फैल सकती है. ग्रामीणों ने सड़क पर गंदा पानी बहाने पर आक्रोश व्यक्त किया है.
सड़ गया है गरखै नदी का पानी
मेदनीचौकी. प्रखंड के गरखै नदी का पानी इन दिनों जमा होने के कारण सड़ गया है. इसमें जलकुंभी भरा है. पानी नहीं दिखता. काले पानी से दुर्गंध आती है. यह नदी प्रखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर दक्षिण गोंदरी पुल के समीप किऊल नदी से कटती है और लगभग 30 किलोमीटर की टेढ़ी-मेढ़ी यात्रा करती हुई […]
