कुंदर, गोपालपुर, रेवटा, मननपुर, जानकीडीह, रामसीर, लाखोचक, सिंहचक, बिछवे जिला की ओर दो-दो एएनएम नियुक्त किया गया लेकिन दो-चार छोड़ कर किसी केंद्रों पर एएनएम नहीं आती हैं. सप्ताह व 15 दिन में एक बार आकर कोरम को पूरा कर लेती हैं. पूरे प्रखंड में एक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जिसमें एक आयुष चिकित्सक आते हैं. वह भी सप्ताह में एक बार ही दर्शन देते हैं. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं रहने से सबसे ज्यादा परेशानी जंगलों में रहनेवाले आदिवासी समाज को होती है. एंबुलेंस सुविधा तो दिया गया लेकिन लखीसराय में रहने के कारण यह सुविधा से वंचित है. स्वास्थ्य केंद्र के लिए पर्याप्त मात्र में जमीन उपलब्ध है. सकी रिपोर्ट अंचलाधिकारी के द्वारा जिला को भेजा गया है फिर भी कोई पहल नहीं दिख रही है.
70 से भी अधिक गांव चिकित्सा सुविधा से वंचित, रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं मरीज
चानन: आजादी के छह दशक बीत जाने के बाद भी चानन प्रखंड को एक भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नसीब नहीं हुआ है. चिकित्सा सुविधा के अभाव में प्रखंड की एक लाख छह हजार की आबादी ग्रामीण चिकित्सकों के भरोसे है. इस प्रखंड में सरकारी या प्राइवेट स्तर से कोई भी एमबीबीएस चिकित्सक की सेवा उपलब्ध […]

चानन: आजादी के छह दशक बीत जाने के बाद भी चानन प्रखंड को एक भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नसीब नहीं हुआ है. चिकित्सा सुविधा के अभाव में प्रखंड की एक लाख छह हजार की आबादी ग्रामीण चिकित्सकों के भरोसे है. इस प्रखंड में सरकारी या प्राइवेट स्तर से कोई भी एमबीबीएस चिकित्सक की सेवा उपलब्ध नहीं है.
हालत यह है कि प्रसव या अचानक गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज के लिए लखीसराय व जमुई ले जाना पड़ता है. यह सड़क मार्ग से 15-16 किलोमीटर दूर पड़ता है. कई मामले में इलाज के अभाव में रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं. चानन प्रखंड अंतर्गत 10 पंचायतों में 70 से भी अधिक गांव है. पूरे प्रखंड में 10 उप स्वास्थ्य केंद्र है.