संगठन विस्तार में फिर से जुटे नक्सली

लखीसराय: नेपाल सरकार में माओवादियों की सीधी भागीदारी का असर कहें या लगातार मिल रही कामयाबी. माओवादियों की नजर अब सत्ता पर टिकने लगी है. इसी लिहाज से अब माओवादी थिंक टैंक अपनी कार्ययोजना तैयार कर इसे अंजाम देने मंे भी लगे हैं. जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों से छन कर आ रही खबरों पर […]

लखीसराय: नेपाल सरकार में माओवादियों की सीधी भागीदारी का असर कहें या लगातार मिल रही कामयाबी. माओवादियों की नजर अब सत्ता पर टिकने लगी है. इसी लिहाज से अब माओवादी थिंक टैंक अपनी कार्ययोजना तैयार कर इसे अंजाम देने मंे भी लगे हैं.

जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों से छन कर आ रही खबरों पर अगर गौर करें तो इसके लिए संगठन दो-तीन स्तरों पर कार्य कर रही है. नक्सली संगठन के सबसे निचली इकाई (जिसे मिलिशिया या जनसेना के नाम से जानते हैं) के विस्तार मे तेजी से लगे हैं. संगठन के लोग प्रत्येक घर से एक युवक या युवती को शामिल करने का फरमान जारी कर चुके हैं. तो दूसरी तरफ संगठन से जुड़े बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता नक्सली विचारधारा से जुड़े साहित्य एवं अन्य स्त्रोतों की मदद से भी संगठन विस्तार में लगे हैं. और इन सब जरूरतों को पूरा करने के लिए नक्सली योजनाबद्ध तरीके से लेवी वसूलने में भी लगे हैं.

जानक ारों की मानें तो जिले के कजरा, पीरी बाजार, घोघी बरियारपुर, सहित चानन प्रखंड के पहाड़ों की तलहटी में बसा शायद ही कोई ऐसा गांव हो जो नक्सलियों के प्रभाव वाले इलाके में न हो. इन गांवों के ग्रामीण न सिर्फ निम्न स्तर का जीवन जीते हैं, बल्कि उनमें शिक्षा का अभाव है. इस कारण सरकारी योजनाएं इन क्षेत्रों में आसानी से नहीं पहुंचती हंै. और जो पहुंचती भी हैं, उनमें बिचौलिए आधी राशि हड़प लेते हैं. बाकी में नक्सलियों को लेवी भी देनी होती है. सूत्रों की मानें तो कजरा, पीरी बाजार, चानन आदि प्रखंडों के पहाड़ी इलाके में चल रही सारी विकास योजनाओं में नक्सलियों की भी हिस्सेदारी होती है. इनके द्वारा अधिक हिस्सेदारी की मांग के बाद चुकता किये जाने में आनाकानी के कारण भी कई विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं. आनाकानी की सूरत में योजना का कार्य करवा रहे लोगों की पिटाई भी की जाती है. लेवी मद में प्राप्त धन की सहायता से भी संगठन विस्तार में सहूलियत होती है. नक्सलियों द्वारा लेवी वसूली की शिकायत पर प्रशासनिक अधिकारियों की खामोशी के कारण पंचायतों के मुखिया या अन्य जन प्रतिनिधियों को संगठन के सामने शीश झुकाये रखने के अलावा अन्य कोई चारा भी नहीं होता है.

इसकी एक बानगी अभी हाल ही मंे सूर्यगढ़ा अंचल के शिवडीह के समीप देखने को मिली. मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हो रहे सड़क निर्माण में लगे ठेकेदार का बोलेरो आग के हवाले कर दिया और मुंशी व चालक को लेकर जंगल की ओर चले गये. बाद में आपसी सहमति से दोनों व्यक्ति मुक्त हुए.

इस संबंध में पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की कमी है. उसके निदान का प्रयास किया जा रहा है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के विरुद्ध संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. हाल के दिनों में एरिया कमांडर वीरेंद्र कोड़ा समेत दो नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है.

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