कजरा : पुलिस महकमें ने नक्सली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आत्मसमर्पण नीति पर जोड़ दिया है और शासन द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं के बारे में अवगत कराते हुए मुख्यधारा से हट चुके लोगों से मुख्य धारा में जुड़कर योजनाओं का लाभ लेने की अपील संबंधित आदिवासी गांव में पोस्टर चिपकाकर और आदिवासी समाज के लोगों से मिलकर समझाया. इस दौरान मुंगेर प्रक्षेत्र डीआईजी ने पुलिस विभाग के आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के जानकारी सभी आदिवासी लोगों को दी.
नक्सलियों को किसी प्रकार की मदद नहीं करें ग्रामीण : डीआईजी
कजरा : पुलिस महकमें ने नक्सली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आत्मसमर्पण नीति पर जोड़ दिया है और शासन द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं के बारे में अवगत कराते हुए मुख्यधारा से हट चुके लोगों से मुख्य धारा में जुड़कर योजनाओं का लाभ लेने की अपील संबंधित आदिवासी गांव में पोस्टर चिपकाकर और आदिवासी […]

ग्रामीणों से अपने परिचितों व रिस्तेदारों जो भी नक्सलियों के साथ जुड़कर हिंसा में लिप्त है, उन्हें नक्सलियों का साथ छोड़कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया और नक्सलियों को किसी प्रकार की मदद न देने की अपील की.
आत्मसमर्पण करने वालों को मिलेगा लाभ
डीआईजी ने कहा कि भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पण और पुनर्वास के तहत समर्पण करने के पश्चात तत्काल सहायता के तौर पर दो लाख 50 हजार रुपये नगद राशि प्रदान किये जाने की जानकारी देते हुए कहा कि विस्फोटक समान व हथियार से साथ समर्पण करने पर अतिरिक्त 35 हजार रुपये तत्काल सहायता राशि के रूप में प्रदान की जायेगी.
आत्मसमर्पण करने वालों को योग्यता के अनुसार रोजगार के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा. इसके साथ ही 36 महीना तक चार हजार रुपये प्रति माह भत्ता भी प्रदान किया जायेगा. आत्मसमर्पण करने वालों के परिवार की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता पर जिला पुलिस विशेष तौर पर ध्यान देगी.