- दूसरे चरण की खुदाई से मिले सामग्रियों की करायी जा रही फोटोग्राफी, तैयार होगा
- गुरुवार को खुदाई के दौरान दक्षिण दिशा स्थित आंगन में ड्रेनेज सिस्टम
- खुदाई के प्रथम चरण में उत्तरी क्षोर पर मिल चुका है महाप्रणाल, जिसे देख सीएम भी हुए थे गदगद
- अब तक की खुदाई में मिल चुका है बौद्ध महाविहार का विस्तृत स्वरूप
लखीसराय : ऐतिहासिक लाली पहाड़ी की खुदाई कार्य के दूसरे चरण का कार्य इस वर्ष अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. खुदाई कार्य की मॉनेटरिंग कर रहे विश्वभारती विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर खुदाई कार्य समाप्त कर दिया जायेगा.
अब तक की खुदाई के दौरान मिली पुरातात्विक वस्तुओं व भग्नावशेषों सहित खुदाई स्थल की फोटोग्राफी करायी जा रही है, जिससे खुदाई कार्य में मिले सामग्रियों का डाटा तैयार किया जा सके और इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जा सके. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान बुधवार को बौद्ध महाविहार के आंगन का विस्तृत स्वरूप मिलने के साथ ही इसके दक्षिणी दिशा में अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम भी मिला है.
इससे पूर्व प्रथम चरण की खुदाई के दौरान उत्तरी छोर पर महाप्रणाल मिला था, जिससे यह साबित होता है कि उस समय की सभ्यता भी कितनी विकसित रही होगी. उन्होंने बताया कि महाप्रणाल मिलने के बाद 30 अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं लाली पहाड़ी का निरीक्षण किया था और महाप्रणाल को देख काफी प्रसन्न हुए थे.
डॉ कुमार ने बताया कि खुदाई कार्य का एक सीजन होता है. जिसके दौरान खुदाई करने के साथ ही उसका पूरा डाटा व फोटोग्राफी करायी जाती है. जिसमें काफी वक्त लगता है. बरसात का मौसम आने से पूर्व सभी कार्य को संपन्न करा लेना अत्यंत आवश्यक होता है.
डॉ कुमार ने बताया कि अब तक खुदाई के दौरान बौद्ध विहार में बौद्ध भिक्षुओं के रहने के 70 से अधिक कक्ष मिल चुके हैं. वहीं अनुमान के मुताबिक यहां 96 कक्ष होने की संभावना है. डॉ कुमार ने बताया कि खुदाई के दौरान कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह बौद्ध महाविहार बौद्ध भिक्षुणी का भी साधना स्थल रहा होगा.
क्योंकि खुदाई के दौरान तांबे की चूड़ियां सहित तंत्र साधना में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री भी मिली है. वहीं उन्होंने बताया कि खुदाई के दौरान 12 सुरक्षा टावर के मिलने से यह साबित हुआ है कि यहां की सुरक्षा का भी काफी ख्याल रखा गया था.
खुदाई के बाद इसे संरक्षित करने की है आवश्यकता : डॉ अनिल कुमार ने कहा कि लाली पहाड़ी अब राष्ट्रीय धरोहर बन चुका है. इसकी खुदाई के बाद इसे संरक्षित रखने की अत्यंत आवश्यकता है. इसके साथ ही सरकार को चाहिए की इसे संरक्षित करने के साथ ही इसे पर्यटकों के लिए भी उपलब्ध करावें, जिससे लखीसराय जिला भी पर्यटन के क्षेत्र में विकसित हो सके.
