24वां जिला स्थापना दिवस मंगलवार को प्रगति मार्च के साथ धूमधाम से रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया

लखीसराय : 24वां जिला स्थापना दिवस मंगलवार को प्रगति मार्च के साथ धूमधाम से रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया जायेगा. जिसकी तैयारियां भी पूरी कर ली गई है, लेकिन इंद्र भगवान बाधा डालने में लगे हैं. इधर, 24 वर्ष जिला स्थापना दिवस का हो गया, लेकिन जिला के शिक्षा विभाग का अपना भवन नहीं नसीब […]

लखीसराय : 24वां जिला स्थापना दिवस मंगलवार को प्रगति मार्च के साथ धूमधाम से रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया जायेगा. जिसकी तैयारियां भी पूरी कर ली गई है, लेकिन इंद्र भगवान बाधा डालने में लगे हैं. इधर, 24 वर्ष जिला स्थापना दिवस का हो गया, लेकिन जिला के शिक्षा विभाग का अपना भवन नहीं नसीब हो सका. जिसके कारण आज भी डीइओ कार्यालय केआरके प्लस टू भवन में चल रहा है. जिससे विद्यालय के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र/ छात्राओं को अध्ययन अध्यापन में घोर कठिनाइओं का सामना करना पड़ रहा है. इस जिला को निर्वतमान विधायक कृष्णचंद्र प्रसाद सिंह के पहल पर निर्वतमान मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने मुंगेर से अलग कर 3 जुलाई 1994 ई में जिला स्थापित किया था.

जबकि डीइओ कार्यालय मुंगेर डीइओ कार्यालय से अलग होकर 1999 में अस्तित्व में आया था. प्रथम डीइओ के रूप में सुरेश चौधरी ने लखीसराय में 5 जनवरी 1999 पदभार ग्रहण किया था. बिना शिक्षा कार्यालय के शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों ने केआरके उच्च विद्यालय के समविकास योजना से 2007 में बने प्लस टू भवन को कब्जा कर कर डीइओ कार्यालय खोल दिया, जिसमें साक्षरता लेखा योजना, आरएमएसए, स्काउट गाइड एवं जिला खेल पदाधिकारी कार्यालय चल रहा है. वहीं महिला विद्या मंदिर में शिक्षा विभाग का स्थापना कार्यालय और सर्वशिक्षा अभियान एवं मध्यान भोजन योजना विभाग के लिए किराये का भवन लिया गया था. इधर, केआरके उच्च विद्यालय के प्लस टू के विद्यार्थियों को 10 वर्षों से भवन के अभाव में पुराने भवन में अध्ययन अध्यापन कठिनाइयों को झेलते हुए करनी पड़ रही है. फिर भी शिक्षा विभाग इसको मुक्त नहीं कर रही और ना ही अपना भवन बना रही है.

बोले प्रभारी
केआरके उच्च विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य जिलेश्वर पंडित ने बताया कि डीइओ को बच्चे के पठन-पाठन में हो रहे कठिनाई पर लिखा गया है और भवन खाली करने का आग्रह किया है, लेकिन भवन खाली नहीं हो सका.
बोली डीइओ
डीइओ सुनयना कुमारी ने कहा कि उन्होंने जब से योगदान दिया है तब से शिक्षा विभाग के अपने भवन को लेकर शिक्षा विभाग के निदेशक को आवश्यक लिखा पढ़ी कर रहीं हूं, जिससे शिक्षा विभाग का अपना भवन हो सके. परन्तु जमीन के अभाव में कठिनाई पैदा हो रही है.

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