आरडीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और शिक्षाविद् डॉ केपी ठाकुर का निधन, शिक्षा जगत में शोक की लहर

आरडीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ केपी ठाकुर का मुंबई में निधन हो गया. उनके निधन पर शिक्षाविदों और कॉलेज परिवार ने गहरी संवेदना व्यक्त की.

KP Thakur Death News: डॉ केपी ठाकुर का निधन बुधवार को मुंबई में हो गया. आरडीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और प्रख्यात शिक्षाविद् के निधन की खबर मिलते ही शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई. उनके छात्रों, सहकर्मियों और शिक्षाविदों ने इसे शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.

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शिक्षा जगत ने खोया एक विद्वान शिक्षक

डॉ केपी ठाकुर लंबे समय तक आरडीएस कॉलेज से जुड़े रहे और अपनी विद्वता तथा शैक्षणिक योगदान के लिए जाने जाते थे. अंग्रेजी भाषा और व्याकरण के क्षेत्र में उनकी विशेष पहचान थी. उन्होंने हजारों छात्रों के जीवन को शिक्षा के माध्यम से दिशा देने का कार्य किया.

उनके निधन की सूचना मिलने के बाद शिक्षकों, पूर्व छात्रों और शिक्षाविदों ने गहरा दुख व्यक्त किया है.

अंग्रेजी भाषा और व्याकरण के क्षेत्र में बनाई अलग पहचान

डॉ केपी ठाकुर की पहचान केवल एक शिक्षक या प्राचार्य तक सीमित नहीं थी. अंग्रेजी भाषा शिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है.

उनकी लिखी पुस्तकें ‘A Practical Guide to English Grammar’ और ‘A Practical Guide to English Translation and Composition’ बिहार समेत देशभर के छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रहीं. प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक अध्ययन में इन पुस्तकों का व्यापक उपयोग किया जाता है.

डॉ के पी ठाकुर द्वारा लिखी किताबें – फोटो: प्रभात खबर

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आरडीएस कॉलेज परिवार ने जताया शोक

आरडीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ शशि भूषण कुमार ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ केपी ठाकुर के निधन से पूरा कॉलेज परिवार स्तब्ध है. उन्होंने कहा कि कॉलेज परिवार इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों के साथ खड़ा है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है.

राम दयालु सिंह महाविद्यालय – फोटो: RDS College Site

शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय परिवार ने दी श्रद्धांजलि

डॉ केपी ठाकुर के निधन पर विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष डॉ अनीता सिंह, पूर्व प्रॉक्टर डॉ वीएस राय, डॉ नीलिमा झा, डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता, सीनेटर डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ एमएन रजवी, डॉ आरती कुमारी और डॉ ललित किशोर समेत कई शिक्षाविदों ने गहरी संवेदना व्यक्त की.

सभी ने उनके शैक्षणिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो विरासत छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.

छात्रों के बीच हमेशा जीवित रहेगा उनका योगदान

डॉ केपी ठाकुर भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी पुस्तकें, उनका शैक्षणिक योगदान और विद्यार्थियों को दी गई सीख उन्हें हमेशा जीवित रखेगी. शिक्षा जगत में उनका नाम सम्मान और आदर के साथ याद किया जाता रहेगा.

शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति

डॉ केपी ठाकुर का निधन बिहार के शैक्षणिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है. उनके जाने से अंग्रेजी शिक्षा और अकादमिक जगत में एक ऐसा रिक्त स्थान पैदा हुआ है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी.

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By Aaruni Thakur

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