किशनगंज जिले के ठाकुरगंज स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, लोधा में गुरुवार को एक विशेष 'व्यक्तित्व विकास एवं नैतिक शिक्षा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर जीवन जीने की कला, चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और आत्मविकास का संदेश दिया गया. आनंद मार्ग प्रचारक संघ के वरिष्ठ संन्यासी आचार्य पूर्णदेवानन्द अवधूत ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत कर छात्रों को योग और ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास कराया.
"केवल अंक और सर्टिफिकेट पाना ही शिक्षा नहीं"
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य पूर्णदेवानन्द अवधूत ने कहा कि यदि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना और डिग्री हासिल करना रह जाए, तो वह अधूरी है.
"सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति के विचारों को संकीर्णता से बाहर निकालकर व्यापक बनाए, जीवन में अनुशासन सिखाए, मजबूत चरित्र का निर्माण करे और समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा करे."
श्री श्री आनंदमूर्ति के 'EDUCATION' का अर्थ समझाया
आचार्य जी ने आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति द्वारा प्रतिपादित "EDUCATION" शब्द के प्रत्येक अक्षर की व्याख्या करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा मनुष्य के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक—तीनों स्तरों पर संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास की एक सतत प्रक्रिया है.
विद्यार्थियों ने किया योगासन और ध्यान का अभ्यास
कार्यक्रम के दौरान मानसिक एकाग्रता और स्वास्थ्य सुधार के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया:
- मानसिक एकाग्रता और तनाव मुक्ति: योग और ध्यान को केवल शारीरिक कसरत न मानकर एकाग्रता, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन बढ़ाने का सर्वोत्तम माध्यम बताया गया.
- व्यावहारिक सत्र: विद्यार्थियों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने योग्य आसान योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया गया, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया.
शिक्षकों और छात्रों में दिखा उत्साह
इस अवसर पर उत्क्रमित उच्च विद्यालय लोधा के प्रधानाध्यापक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे. विद्यार्थियों ने इस सत्र को अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक बताया. विद्यालय परिवार ने ऐसे आयोजनों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी करार दिया.
