बारिश थमते ही उमस भरी गर्मी का सितम, सुबह 10 बजे ही सड़कों पर पसरा सन्नाटा, शीतल पेय की बढ़ी मांग

Weather: किशनगंज जिले के पौआखाली में लगातार चक्रवाती बारिश का दौर थमते ही मौसम ने अचानक करवट बदल ली है. पिछले दो दिनों से आसमान से बरस रही आग और उमस (ह्यूमिडिटी) के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे लोग दोपहर के समय घरों में कैद होने को मजबूर हैं.

पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट

Weather: सीमांचल के कई इलाकों में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के थमने के बाद अब मौसम का मिजाज बेहद तीखा और कष्टदायक हो गया है. पौआखाली नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से जारी कड़क धूप और उमस भरी भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है. हालात यह हैं कि सुबह ढलते ही सूरज की किरणें शरीर को झुलसाने लगती हैं. हवा की गति थमने के कारण उमस का स्तर काफी बढ़ गया है, जिससे हर कोई पसीने से तर-बतर नजर आ रहा है.

दोपहर होते ही बाजारों में पसरा सन्नाटा, घरों में दुबके लोग

मौसम में आए इस अचानक बदलाव और आम जनता की दिक्कतों का सिलसिलेवार विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से देखा जा सकता है:

  • सड़कों पर वीरानी: तेज धूप और असहनीय उमस के कारण पौआखाली नगर की प्रमुख सड़कें और व्यापारिक मार्ग सुबह 10:00 बजे के बाद से ही सूने नजर आने लगते हैं. दोपहर 12:00 से 04:00 बजे के बीच बाजारों में आवाजाही पूरी तरह नगण्य (बेहद कम) हो जाती है.
  • पूरा बदन ढककर निकल रहे लोग: तापमान में आई इस अप्रत्याशित उछाल के चलते लोग अपने दैनिक और जरूरी प्रशासनिक कार्यों के लिए भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. जो लोग बेहद जरूरी काम से निकल भी रहे हैं, वे छतरी, सनग्लासेस और चेहरे व पूरे बदन को सूती कपड़ों से ढककर ही सफर कर रहे हैं.

बिजली कटते ही पेड़ों की छांव बन रही सहारा, पंखे-कूलर भी बेअसर

कस्बाई इलाकों का हाल: गर्मी और उमस का आलम यह है कि बंद कमरों के भीतर चल रहे पंखे और कूलर भी गर्म हवा फेंक रहे हैं, जिससे लोगों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है. वहीं, ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बिजली की अघोषित कटौती (पावर कट) ने इस संकट को और दोगुना कर दिया है. बिजली गुल होते ही बच्चे और बुजुर्ग छटपटाने लगते हैं और लोग गर्मी से बचने के लिए मजबूरन अपने घरों से बाहर निकलकर बगीचों और पेड़ों की प्राकृतिक छांव व हवा का सहारा ले रहे हैं.

बाजारों में शीतल पेय पदार्थों की चांदी, गन्ने के रस और लस्सी की भारी मांग

हाइड्रेशन के लिए उमड़ी भीड़:

बढ़ते पारे और लू के थपेड़ों के बीच कपड़ा और अन्य पारंपरिक बाजारों में भले ही रौनक गायब हो गई हो, लेकिन ठंडे और शीतल पेय पदार्थों के बाजार में जबरदस्त तेजी (उछाल) देखी जा रही है. पौआखाली नगर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगी गन्ने के रस, पंजाबी लस्सी, डाब (नारियल पानी), नींबू शिकंजी और कोल्ड ड्रिंक्स की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. शरीर का तापमान संतुलित रखने और खुद को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए राहगीर इन तरल पदार्थों का जमकर सेवन कर रहे हैं.

चिकित्सकों की जरूरी सलाह: डिहाइड्रेशन से बचें

स्वास्थ्य परामर्श:

पौआखाली पीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सकों और मौसम जानकारों के मुताबिक, बारिश के तुरंत बाद जब तेज धूप निकलती है, तो वातावरण में ‘इवैपोरेशन’ (वाष्पीकरण) के कारण उमस बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. इस मौसम में शरीर से अत्यधिक पसीना बहने के कारण ‘डिहाइड्रेशन’ (शरीर में पानी की कमी) और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक रहता है.

स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि बहुत जरूरी न हो, तो दोपहर के वक्त धूप में सीधे निकलने से पूरी तरह परहेज करें. खाली पेट घर से बाहर न जाएं और दिनभर में कम से कम 4 से 5 लीटर पानी, ओआरएस का घोल, घरेलू मट्ठा या ग्लूकोज का सेवन करते रहें, ताकि मौसमी बीमारियों की चपेट में आने से बचा जा सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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