कचरे से निजात का सपना, बारिश में थमा एमआरएफ केंद्र का काम

ठाकुरगंज में करोड़ों की लागत से बना रहा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर कचरा प्रबंधन के बजाय खुद कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है. पिछले कई महीनों से निर्माण कार्य रुका हुआ है, जिससे शहर के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का सपना अधूरा है.

नगर पंचायत ठाकुरगंज में ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और रीसाइक्लिंग की बड़ी उम्मीदें फिलहाल सरकारी फाइलों, चमकते बोर्ड और लोहे की जंग खाती सरिया के बीच अटकी हुई हैं. शहर के कचरे को छांटने और संसाधित करने के मकसद से करीब 1.49 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्र (MRF - Material Recovery Facility) का निर्माण कार्य पिछले कई महीनों से अधर में लटका हुआ है.

योजना स्थल पर लगा बोर्ड परियोजना की सुनहरी तस्वीर दिखाता है, लेकिन हकीकत यह है कि जिस केंद्र को कचरा प्रबंधन का रोल मॉडल बनना था, उसी के आसपास खुले में कचरे का भारी ढेर जमा है.

पिलर का सरिया हो गया टेढ़ा

योजना के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति

कागजों और बोर्ड पर दर्ज योजना का ब्योरा:

  • स्वीकृत लागत: ₹1,48,68,300 (करीब 1.49 करोड़ रुपये).
  • दैनिक क्षमता: प्रतिदिन 5 टन (5 TPD) सूखे कचरे की छंटाई और वैज्ञानिक प्रबंधन.
  • अनुबंध की शर्त: केंद्र के सिविल निर्माण के साथ-साथ अगले 5 वर्षों तक इसका संचालन एवं रखरखाव (O&M) भी एजेंसी को ही करना है.
  • जमीनी सच्चाई: मौके पर केवल आधा-अधूरा पिलर और पिलिंथ का ढांचा खड़ा है, जबकि निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है.
कार्य स्थल के बगल में कूड़े का ढेर

बारिश का बहाना, एजेंसी ने दिया 'दिसंबर' का नया अल्टीमेटम

निर्माण कार्य बंद होने को लेकर निर्माण एजेंसी (अभिकर्ता) ने मौसम को जिम्मेदार ठहराया है:

  • एजेंसी का पक्ष: निर्माण एजेंसी का कहना है कि लगातार मानसूनी बारिश और जलभराव के चलते काम रोकना पड़ा था. मौसम सामान्य होते ही निर्माण में तेजी लाई जाएगी.
  • दिसंबर तक का दावा: संवेदक ने दावा किया है कि दिसंबर तक निर्माण कार्य हर हाल में पूरा कर नगर पंचायत को सौंप दिया जाएगा. हालांकि, काम की मौजूदा गति को देखते हुए तय मियाद पर सवाल उठ रहे हैं.

बड़ा विरोधाभास: जिस केंद्र से हटना था कचरा, वहीं बना डंपिंग यार्ड

परियोजना स्थल पर सबसे चिंताजनक स्थिति स्वच्छता की ही देखने को मिल रही है:

  • खुले में फैला प्लास्टिक: एमआरएफ का काम शहर से प्लास्टिक, पॉलीथिन, गत्ता, कागज और धातु को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजना था. लेकिन विडंबना यह है कि निर्माणाधीन बाउंड्री और आसपास खुले में भारी मात्रा में कचरा सड़ रहा है.
  • जेसीबी से लीपापोती: मौके पर जमा कचरे को ठिकाने लगाने के लिए जेसीबी से गड्ढों को ढकने और समतल करने की तस्वीरें सामने आई हैं, जो वैज्ञानिक निस्तारण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
प्राकलन बोर्ड | Prabhat Khabar Network

कचरा मुक्त ठाकुरगंज के लिए क्यों जरूरी है MRF सेंटर?

ठाकुरगंज एक तेजी से विकसित होता व्यावसायिक नगर है, जहां प्रतिदिन टनों कचरा सड़कों और खुले मैदानों में फेंका या जलाया जाता है:

  • एमआरएफ सेंटर शुरू होने से पर्यावरण प्रदूषण और कचरा जलाने से निकलने वाले जहरीले धुएं से मुक्ति मिलेगी.
  • सूखे कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग से नगर पंचायत को राजस्व मिलेगा और पर्यावरण को नुकसान भी कम होगा.

अब सबकी निगाहें निर्माण एजेंसी के उस दावे पर टिकी हैं कि क्या दिसंबर तक ठाकुरगंज को केवल एक अधूरा बोर्ड मिलेगा या फिर शहर को वास्तव में कचरे से मुक्ति दिलाने वाला आधुनिक एमआरएफ सेंटर तैयार होकर काम शुरू करेगा.

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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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