जिले में वादियों जैसी ठंड, कोहरे से परेशानी

जिले में लगातार तापमान नीचे गिर रहा है

-पूरे दिन सूर्य ने नहीं दिया दर्शन, बढ़ी कनकनी

-पूरे जिले में जन जीवन अस्त-ब्यस्त-कोल्ड ने जमाई कुल्फी. -घरों में ठिठक रहे लोग.

किशनगंज

जिले में लगातार तापमान नीचे गिर रहा है. पारा लगातार गिरे रहने से यहां वादियों जैसी ठंड का अहसास हो रहा है. घने कोहरे, सिहरन और बादलों से जनजीवन त्रस्त है. कोहरे के कारण विजिबिलिटी लगभग 20 मीटर तक ही रही. हालांकि दोपहर बाद फिर स्थिति वही हो गई. आसमान में बादलों के जमे होने के कारण सूर्य की झलक नहीं दिखी. इसके कारण ठिठुरन काफी बढ़ी हुई है. वहीं पछिया हवा ने शीत लहर के प्रकोप को बढ़ाया.

दरअसल, शुक्रवार को दिन के 11:00 बजे ही सूर्य ने दर्शन दिए थे. लेकिन,शनिवार को धूप नहीं निकलने से मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ रहा. बल्कि यूं कहें कि अभी कोल्ड डे कंडिशन्स बना हुआ है.

बढ़ी ठंड से अर्थ बाजार भी ढीला

ठंडक बढ़े रहने के कारण दूरदराज से लोगों का शहर में यहां तक कि गांव के बाजार में भी आना काफी कम हो गया है. इसकी तस्दीक सवारी वाहनों से भी हो रही है. कई वाहन चालकों ने बताया कि फिलहाल सवारी कम मिलने से तेल खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है. दूसरी ओर व्यवसायियों ने बताया कि गणतंत्र दिवस को लेकर रेडिमेट परिधानों पर कंपनियों ने कुछ विशेष छूट का ऑफर दिया गया था. इस कारण कुछ ग्राहक खरीददारी करने पहुंचे हुए थे. लेकिन, बढ़ी ठंड की वजह से गत दो दिनों से बिक्री की स्थिति बुरी बनी हुई है.

इस सीजन में पिछले 3 दिनों से न्यूनतम तापमान काफी तेजी से गोता लगा रहा है. जब दो दिन पूर्व दिन के तापक्रम में गिरावट दर्ज की गई थी. उसी में शुक्रवार और शनिवार को शीतलहर की चपेट में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे पहुंच गया. कड़ाके की ठंड से लोग ठिठुर रहे हैं. सर्द हवा और हाड़ कंपा देने वाली ठंढ़ ने जीना मुश्किल कर दिया है. जिले के विभिन्न जगहों पर भरण पोषण के लिए मेहनत और मजदूरी करने वाले लोग परेशान हैं. ठंड से ठिठुरते लोग इसके बचाव के लिए चाय की भट्ठी के पास सिमटे दिखाई पड़ रहे है या फिर इधर उधर पड़ी लकड़ी, टायर व कागज को जला कर सर्दी से निजात पाने का जुगाड़ कर रहे है. सबसे बड़ी परेशानी दैनिक मजदूरों व रिक्शा चलाने वाले लोगों को झेलनी पड़ रही है.

नहीं जल रहें हैं अलाव

प्रशासनिक स्तर से जिले में अलाव की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को काफी परेशानी हो रही है. खासकर सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलना नितांत आवश्यक है.

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By AWADHESH KUMAR

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