ठाकुरगंज : ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन से गुजरने वाले अलुआबाड़ी–सिलीगुड़ी रेलखंड पर लंबे समय से ट्रेनों का परिचालन हो रहा है. ट्रेनों के आवागमन के दौरान रेलवे क्रॉसिंग का फाटक बंद होना शहर की पुरानी समस्या है. अब अररिया–गलगलिया रेलखंड पर परिचालन शुरू होने के बाद ठाकुरगंज से जुड़ा रेल नेटवर्क और सक्रिय हुआ है. ऐसे में रेलवे क्रॉसिंग पर सड़क यातायात का दबाव भी बढ़ गया है.
ट्रेन के गुजरने के लिए फाटक बंद होते ही सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. ट्रेन के गुजरने के बाद फाटक खुलता है, लेकिन तब तक जमा वाहनों का दबाव एक साथ सड़क पर आ जाता है. इससे कई बार जाम की स्थिति बन जाती है. बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के बीच रेलवे क्रॉसिंग शहर की यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है.
दो रेलखंड, एक क्रॉसिंग और बढ़ता यातायात दबाव
ठाकुरगंज रेलवे क्रॉसिंग पर पहले से अलुआबाड़ी–सिलीगुड़ी रेलखंड की ट्रेनों के आवागमन का दबाव रहा है. अररिया–गलगलिया रेलखंड पर परिचालन शुरू होने के बाद क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ा है. इसका असर सड़क यातायात पर भी दिखाई दे रहा है.
समस्या यह है कि रेल नेटवर्क बढ़ रहा है, लेकिन रेलवे लाइन पार करने के लिए सड़क यातायात के सामने आज भी वही पुराना रेलवे फाटक है. फाटक बंद होने पर अस्पताल, थाना, बाजार, बैंक, स्कूल, कॉलेज और अन्य जरूरी संस्थानों की ओर जाने वाले लोगों को भी ट्रेन के गुजरने तक इंतजार करना पड़ता है.
2007 से उठ रही ओवरब्रिज की मांग
ठाकुरगंज रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग करीब दो दशक पुरानी है. वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्य पार्षद नवीन यादव ने एनएफ रेलवे के चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर गेट संख्या SK-258 पर रोड ओवरब्रिज निर्माण की मांग की थी.
इसके बाद भी समय-समय पर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की ओर से इस समस्या को रेलवे और प्रशासन के समक्ष उठाया जाता रहा है. लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी रेलवे क्रॉसिंग का स्थायी विकल्प नहीं बन पाया है.
फाटक बंद होने पर मरीजों और स्कूली वाहनों को परेशानी
रेलवे फाटक बंद रहने के दौरान मरीजों, एंबुलेंस, स्कूली वाहनों और जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है. ट्रेन के गुजरने का इंतजार करते हुए वाहनों की कतार बढ़ती जाती है. फाटक खुलने के बाद दोनों ओर से एक साथ वाहनों का आवागमन शुरू होने पर यातायात संभालना भी चुनौती बन जाता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, लेकिन इसके साथ सड़क यातायात के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए.
रेल की रफ्तार बढ़ी, सड़क को अब भी फाटक खुलने का इंतजार
ठाकुरगंज में आरओबी या सुरक्षित अंडरपास का निर्माण रेलवे फाटक की समस्या का स्थायी विकल्प हो सकता है. इससे ट्रेनों का परिचालन बिना सड़क यातायात को रोके जारी रह सकेगा और लोगों को फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
शहरवासियों का कहना है कि अलुआबाड़ी–सिलीगुड़ी रेलखंड पर पहले से चल रहे परिचालन और अररिया–गलगलिया रेलखंड पर शुरू हुए परिचालन के बीच ठाकुरगंज की सड़क यातायात व्यवस्था को नए सिरे से देखने की जरूरत है. बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को देखते हुए रेलवे क्रॉसिंग का विकल्प अब शहर की जरूरत बन चुका है.
रेल नेटवर्क बढ़ रहा है, ट्रेनें बढ़ रही हैं, लेकिन सड़क को आज भी फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है. 19 साल से उठ रही ओवरब्रिज की मांग पर अब ठोस पहल कब होगी, यही ठाकुरगंज के लोगों का सवाल है.
किशनगंज में मौसम बदला तो बढ़ी लोगों की चिंता, क्लिक करें और जानें आज बारिश होगी या नहीं?
