ठाकुरगंज: आलू की बंपर पैदावार ने किसानों को रुलाया, 300 रुपये क्विंटल बिक रही उपज; कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा देना भी हुआ मुश्किल

किशनगंज के किसानों की बंपर आलू पैदावार इस बार राहत की जगह आफत बन गई है. ₹300 क्विंटल के भाव से भी आलू नहीं बिक रहा, जबकि कोल्ड स्टोरेज का किराया ₹220 क्विंटल है. किसान लागत निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज और सीमावर्ती इलाकों में इस बार आलू की बंपर पैदावार किसानों के लिए राहत के बजाय 'बड़ी आफत' बन गई है. फरवरी-अप्रैल में अच्छी फसल देखकर किसानों ने मुनाफे की उम्मीद में अपनी उपज कोल्ड स्टोरेज में रख दी थी. लेकिन अगस्त बीतने को है और बाजार में खरीदारों के टोटे ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है. स्थिति यह है कि खेत से लेकर फुटकर बाजार तक पहुंचते-पहुंचते आलू की कीमत तो कई गुना बढ़ जा रही है, लेकिन अपना खून-पसीना बहाने वाला अन्नदाता अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहा है.

₹300 में बिक्री और ₹220 किराया: घाटे का यह कैसा गणित?

आलू उत्पादक किसानों के अनुसार, वर्तमान बाजार भाव उनके लिए पूरी तरह बर्बादी का कारण बन चुका है:

  • लागत और खर्च: आलू की खेती में प्रति किलो औसतन 5 से 6 रुपये (500-600 रुपये/क्विंटल) की लागत आती है.
  • भाड़े की तगड़ी मार: कोल्ड स्टोरेज का एक सीजन का किराया ही करीब 220 रुपये प्रति क्विंटल लग जाता है. इसके ऊपर से आढ़त, लदाई, उतराई और छंटाई का खर्च अलग है.
  • कौड़ियों के भाव उपज: किसान अभी औसतन 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आलू बेचने को मजबूर हैं. यानी किराया और ढुलाई का खर्च निकाल दें, तो किसान खाली हाथ रह जाता है.

इस्लामपुर के 5 कोल्ड स्टोरेज में फंसा आलू, खरीदार नदारद

ठाकुरगंज इलाके में आलू की बड़ी आपूर्ति पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इस्लामपुर क्षेत्र से होती है:

  • बाहरी मांग घटी: इस पूरे इलाके में बंपर उत्पादन हुआ है. इसके साथ ही अन्य राज्यों में भी अच्छी पैदावार होने के कारण बाहर की मंडियों से आलू की मांग बेहद कमजोर है.
  • धीमी निकासी से खौफ: इस्लामपुर के पांचों कोल्ड स्टोरेज में भारी मात्रा में आलू जमा है. किसान अपनी उपज बेचने के लिए हर दिन कोल्ड स्टोरेज पहुंच रहे हैं, लेकिन थोक व्यापारियों (खरीदारों) के न मिलने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है.

बाजार में बिचौलियों का खेल: किसान और उपभोक्ता दोनों परेशान

खेत से लेकर उपभोक्ता की थाली तक कीमतों में भारी अंतर और मुनाफे का खेल चल रहा है:

  • थोक और फुटकर का अंतर: खुले बाजार और मंडियों में आलू 800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा है.
  • कौन खा रहा मुनाफा? आढ़त और ढुलाई के नाम पर बिचौलिये मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. नतीजा यह है कि फुटकर बाजार में आम उपभोक्ता को आलू महंगा मिल रहा है, जबकि किसान को उसकी उपज का उचित भाव नहीं मिल पा रहा.


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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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