ठाकुरगंज नगर पंचायत क्षेत्र में कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है. शहर के मुख्य मार्गों से लेकर विभिन्न वार्डों और गलियों में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है.
सड़कों के किनारे फैला घरेलू कचरा, प्लास्टिक, थर्माकोल और पॉलिथीन के ढेर नगर पंचायत के स्वच्छता दावों की कलई खोल रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या यह सामने आ रही है कि सफाईकर्मी झाड़ू लगाकर कचरे को सड़क के किनारे ही छोड़ देते हैं, जिसका समय पर उठाव न होने से स्थिति और भी बदतर हो जाती है.
₹13,97,650 का एकरारनामा, फिर भी धरातल पर सफाई नदारद
नगर पंचायत प्रशासन और आउटसोर्स सफाई एजेंसी के बीच हुए आधिकारिक समझौते के अनुसार शहर में 24×7 यानी साल के 365 दिन लगातार सफाई व्यवस्था संचालित की जानी है.
इस कार्य के लिए दोनों पक्षों के बीच 13,97,650 रुपये का भारी-भरकम एकरारनामा (करार) हुआ है. इसके बावजूद शहर के चौक-चौराहों पर नियमित रूप से कचरा डंप रहना और सफाई के बाद भी घंटों तक कूड़े का उठाव न होना यह दर्शाता है कि करार की अनिवार्य शर्तों और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है.
झाड़ू लगाकर छोड़ दिया जाता है ढेर, वाहनों की रफ्तार से फिर बिखरती है गंदगी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाईकर्मी सुबह के समय झाड़ू लगाकर कचरे को एक जगह एकत्र तो कर देते हैं, लेकिन उसे तत्काल डंपिंग यार्ड या निर्धारित कूड़ेदानों तक पहुंचाने वाला कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचता.
सड़क किनारे लावारिस पड़ा यह कचरा दिनभर चलने वाली तेज हवाओं और वाहनों की आवाजाही से उड़कर दोबारा सड़कों और दुकानों के आगे बिखर जाता है. इससे सफाई होने के कुछ ही देर बाद पूरा इलाका फिर से गंदा और बदहाल नजर आने लगता है.
केवल झाड़ू लगाना सफाई नहीं, वैज्ञानिक निस्तारण तक तय हो प्रक्रिया
स्थानीय प्रबुद्धजनों ने स्पष्ट किया कि सफाई का मतलब महज सड़कों पर झाड़ू फेरना नहीं है, बल्कि कचरे का सही समय पर प्राथमिक संग्रहण, उसका त्वरित उठाव और डंपिंग यार्ड में वैज्ञानिक निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया को धरातल पर उतारना है.
लंबे समय तक रिहायशी इलाकों और बाजारों में सड़ांध मारता कचरा पड़े रहने से भीषण दुर्गंध फैल रही है. इसके कारण इलाके में मच्छरों, मक्खियों और अन्य संक्रामक कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मौसमी और संक्रामक बीमारियों के फैलने की गंभीर आशंका बन गई है.
निगरानी व्यवस्था दुरुस्त करने और जवाबदेही तय करने की उठी मांग
नागरिकों ने नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सफाई एजेंसी के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के लिए सत्यापन तंत्र बनाया जाए. यह तय होना चाहिए कि झाड़ू लगने के कितने मिनटों के भीतर कचरा उठा लिया जाएगा और इसका नोडल पर्यवेक्षक कौन होगा.
शहरवासियों का कहना है कि कागजों और अनुबंधों में सफाई व्यवस्था भले ही 24 घंटे और सातों दिन दर्ज हो, लेकिन उसका वास्तविक प्रभाव नगर की सड़कों पर भी साफ नजर आना चाहिए. लापरवाही बरतने वाली एजेंसी पर जुर्माना लगाने और कचरे का तत्काल उठाव सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है.
