कोचाधामन (किशनगंज) से राजीव कुमार सिंहा की रिपोर्ट
Sun Temple: सीमांचल का ऐतिहासिक भूभाग अपने गर्भ में न जाने कितने पुरातात्विक रहस्य और प्राचीन सभ्यताएं छुपाए हुए है. इसी कड़ी में किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड का ‘बड़ीजान गांव’ आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण गुमनामी के आंसू रो रहा है. इस गांव के बड़ीजान हाट (बाजार) में एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे छठी शताब्दी (6th Century) की भगवान सूर्य की ऐतिहासिक और नायाब प्रतिमा रखी हुई है. इसके अतिरिक्त, गांव के अलग-अलग हिस्सों में प्राचीन भव्य सूर्य मंदिर के नक्काशीदार अवशेष और कसौटी पत्थर के टुकड़े इधर-उधर बिखरे पड़े हैं. ग्रामीणों को आज भी एक ऐसे मसीहा और उद्धारक की तलाश है, जो इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित कर बड़ीजान को देश के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर सके.
पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन ने की थी पहल, पुरातत्व विभाग ने किया था सर्वे
इस ऐतिहासिक स्थल की पृष्ठभूमि और पुरातत्व विभाग की सक्रियता का विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- पुरातत्व विभाग की टीम का आगमन: बड़ीजान गांव के इस गौरवशाली और दबे हुए इतिहास को मुख्यधारा में लाने के लिए सीमांचल के कद्दावर नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री दिवंगत मोहम्मद तस्लीमुद्दीन ने गंभीर प्रयास किए थे. उन्हीं की पहल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक उच्च स्तरीय टीम ने इस स्थल का दौरा किया था.
- ठंडे बस्ते में गई खुदाई की योजना: एएसआई की टीम ने यहाँ कुछ दिनों तक डेरा डालकर गहन अध्ययन किया था और इस पूरे क्षेत्र को पुरातात्विक महत्व के रूप में चिह्नित (टैग) किया था. टीम द्वारा बड़े पैमाने पर खुदाई (Excavation) शुरू करने की तैयारी भी कर ली गई थी, लेकिन कालांतर में (समय बीतने के साथ) राजनीतिक और प्रशासनिक शिथिलता के कारण यह योजना पूरी तरह मंद होकर ठप पड़ गई.
कसौटी पत्थर की मूर्तियां पटना म्यूजियम में, आज भी मिलते हैं प्राचीन सिक्के और हथियार
ग्रामीणों के दावे और पुरातात्विक साक्ष्य: स्थानीय बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि पूर्व में इस स्थल से खुदाई और खोज के दौरान कसौटी पत्थर (Touchstone) से निर्मित भगवान सूर्य और अन्य देवी-देवताओं की कई बेशकीमती मूर्तियां मिली थीं, जिन्हें वर्तमान में सुरक्षा के दृष्टिकोण से ‘पटना म्यूजियम’ (Patna Museum) में संरक्षित करके रखा गया है. विडंबना देखिए कि आज भी इस गांव के खेतों की जुताई या सामान्य खुदाई के दौरान ग्रामीणों को यदा-कदा अत्यंत प्राचीन सिक्के (Coins), दुर्लभ धातुएं और मध्यकालीन व प्राचीन परंपरा के पारंपरिक हथियार मिल जाते हैं, जो यहाँ एक समृद्ध सभ्यता के दफन होने की पुष्टि करते हैं.
नेपाल के राजा और सुरजापुर परगना की स्थापना से जुड़ा है इतिहास
ऐतिहासिक दंतकथा और मान्यताएं:
इतिहास के जानकारों और स्थानीय इतिहासकारों के मुताबिक, छठी शताब्दी के आसपास इस क्षेत्र पर नेपाली मूल के एक प्रतापी राजा का शासन था, जिनका भव्य महल इसी बड़ीजान क्षेत्र में स्थापित था. वह राजा भगवान सूर्य के अनन्य उपासक (भक्त) थे, जिन्होंने यहाँ एक विशाल सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था.
राजा की कोई पुत्र संतान नहीं थी, बल्कि उनकी मात्र दो पुत्रियां थीं— श्रीवती और सूर्यावती. राजा ने अपनी दोनों बेटियों के प्रति अगाध प्रेम के कारण अपने साम्राज्य को दो हिस्सों में बांटकर उनके नाम पर दो प्रसिद्ध परगनों की स्थापना की थी:
- श्रीपुर परगना: बड़ी बेटी श्रीवती के नाम पर स्थापित यह क्षेत्र वर्तमान भौगोलिक सीमा के अनुसार अब नेपाल देश के अंतर्गत आता है.
- सुरजापुर परगना: छोटी बेटी सूर्यावती के नाम पर बना सुरजापुर परगना आज भी इसी कोचाधामन और किशनगंज के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहचान के साथ मौजूद है.
पर्यटन स्थल बनाने की पुरजोर मांग:
बड़ीजान गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग, कला-संस्कृति मंत्रालय और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस स्थल की महत्ता को देखते हुए बिखरे पड़े अवशेषों को एक जगह एकत्रित कर ‘संग्रहालय’ (Museum) बनाया जाए. साथ ही, पीपल वृक्ष के नीचे स्थापित सूर्य प्रतिमा को शेड और मंदिर निर्माण के जरिए सुरक्षित किया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाया जा सके.
