निलंबित एसडीपीओ की ‘काली कमाई’ की जैसे-जैसे खुल रही हैं परतें, वैसे-वैसे कई किरदार निकल रहे मालामाल

निलंबित एसडीपीओ की ‘काली कमाई’ की जैसे-जैसे खुल रही हैं परतें, वैसे-वैसे कई किरदार निकल रहे मालामाल

पत्नी, प्रेमिका…और अब नौकरानी भी करोड़पति! 35 लाख रुपये की महंगी गाड़ी से आती थी काम करने

किशनगंज. पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है. छापेमारी के बाद अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और हर दिन नयी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है. शनिवार को ईओयू की टीम एक बार फिर किशनगंज पहुंची और पूरे मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की. इस बार जांच को और व्यापक बनाते हुए तीन अलग-अलग टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गयी है, जो केस से जुड़े विभिन्न पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही हैं. सूत्रों के अनुसार, एक टीम धर्मगंज इलाके में पहुंची, जहां कुछ अहम इनपुट्स के आधार पर जांच की गयी. वहीं दूसरी टीम जिला परिवहन कार्यालय पहुंची, जहां पूर्व एसडीपीओ और उनके परिजनों के नाम पर दर्ज गाड़ियों का ब्योरा खंगाला गया. टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गौतम कुमार और उनके परिवार के नाम पर कितनी गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं, उनकी खरीद-बिक्री कैसे हुई और इन पर खर्च की गयी रकम का स्रोत क्या है. गाड़ियों के निबंधन से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है.

किशनगंज में इन दिनों एक ही नाम हर जुबान पर है-निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार. वजह भी ऐसी कि हर नया खुलासा पिछले से ज्यादा चौंकाने वाला साबित हो रहा है. यह मामला अब भ्रष्टाचार की ‘फुल फिल्म’ बन चुका है. कहानी में ट्विस्ट पर ट्विस्ट आ रहे हैं. गौतम कुमार की ‘काली कमाई’ का दायरा जितना खुल रहा है, उतना ही हैरान कर रहा है. ईओयू की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस ‘काली कमाई’ की कहानी में नये किरदार जुड़ते जा रहे हैं. अब तक पत्नी और कथित प्रेमिका के नाम पर करोड़ों की संपत्ति की बात हो रही थी. ताजा खुलासे ने इस मामले को और भी चौंकानेवाला बना दिया है. अब घर की नौकरानी भी करोड़पति निकली. ताजा खुलासे के मुताबिक पारो नाम की नौकरानी, जो एसडीपीओ के घर काम करती थी, खुद लग्जरी लाइफ जीती रही है. बताया जा रहा है कि वह करीब 35 लाख रुपये की महंगी गाड़ी से काम पर आती थी. इतना ही नहीं, उसके पास रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक भी है, जो कथित तौर पर उसे ‘गिफ्ट’ में मिली थी. एक आम घरेलू कामगार की जिंदगी और यह शाही ठाठ-यही विरोधाभास अब जांच एजेंसियों को सबसे ज्यादा चौंका रहा है. ताजा खुलासों के बाद नौकरानी पारो अपने परिवार के साथ फरार बतायी जा रही है. जांच एजेंसियां अब उसके बैंक खातों, संपत्ति और निवेश की भी बारीकी से जांच कर रही हैं. इस पूरे मामले ने पुलिस व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं. एक अधिकारी और उसके आसपास के हर करीबी के करोड़पति होने की कहानी अब सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि एक पूरे ‘सिस्टम’ की कहानी बनती जा रही है. और जांच एजेंसियों का कहना है कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, असली परतें अभी बाकी हैं.

सोशल मीडिया ने खोली ‘राज की पोटली’

पारो की लाइफस्टाइल का सच सोशल मीडिया पर भी झलकता है. सामने आये फोटो और वीडियो में वह कभी बुलेट के साथ, कभी कैश के साथ तो कभी एसडीपीओ और उनके करीबी लोगों के साथ नजर आती है. एक वीडियो में उसके हाथ में लाखों रुपये कैश दिख रहा है, तो एक तस्वीर में वह झंडोत्तोलन कार्यक्रम में अधिकारी के साथ खड़ी दिखायी देती है. सूत्रों की मानें तो पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके में उसके नाम पर एक आलीशान बंगला भी बनाया गया है, जिसकी कीमत करोड़ों में बतायी जा रही है. इस केस की सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यही है कि एसडीपीओ से जुड़े हर करीबी शख्स के नाम पर करोड़ों की संपत्ति सामने आ रही है. पत्नी रूबी कश्यप, जो सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, उनके नाम पर आलीशान बंगला और महंगी गाड़ियां. कथित प्रेमिका के नाम पर भी भारी निवेश. और अब नौकरानी, जो आमतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर मानी जाती है, वह भी करोड़ों की संपत्ति की मालकिन. यानी इस कहानी में ‘आम’ कोई नहीं, हर किरदार ‘खास’ और मालामाल है.

100 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति

जांच एजेंसियों का दावा है कि गौतम कुमार ने अपने 32 साल के करियर में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की बेनामी संपत्ति खड़ी की. छापेमारी में 36 जमीन के कागजात, एलआईसी पॉलिसी, नोएडा और गुरुग्राम में निवेश, 60 लाख के गहने और महंगी गाड़ियां बरामद हुई हैं. पूर्णिया, किशनगंज, पटना, अररिया और सिलीगुड़ी समेत 8 ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं.

30 साल में बना ‘सिस्टम’

गौतम कुमार ने 1994 में पुलिस सेवा शुरू की और सीमावर्ती जिलों किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, कटिहार में लंबे समय तक पोस्टिंग रही. आरोप है कि इसी दौरान अवैध बालू खनन, शराब, लकड़ी, पशु और कोयला तस्करी से जुड़े नेटवर्क से उनकी सांठगांठ बनी और यही नेटवर्क उनकी ‘काली कमाई’ की रीढ़ बना.

‘कागज से लेकर कैश’ तक, हर स्रोत की पड़ताल

ईओयू की टीमें अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटा रही हैं, ताकि संपत्ति का वास्तविक आकलन किया जा सके. जमीन, वाहन, निवेश और अन्य संपत्तियों को जोड़कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि कुल संपत्ति कितनी है और वह आय के मुकाबले कितनी अधिक है. गौरतलब है कि 31 मार्च को आर्थिक अपराध इकाई ने धर्मगंज चौक स्थित सरकारी आवास सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. यह कार्रवाई ईओयू के एएसपी के नेतृत्व में की गयी थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की गयी. इस दौरान आय के स्रोत और अर्जित संपत्ति के बीच अंतर का आकलन किया गया, जिसने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया.

60% से ज्यादा ‘अतिरिक्त’ संपत्ति का खुलासा

इस केस में 29 मार्च को ईओयू थाना कांड संख्या 3/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. प्रारंभिक जांच और सत्यापन में सामने आया कि गौतम कुमार की संपत्ति उनकी ज्ञात आय से करीब 60.27 प्रतिशत अधिक है. इसके बाद 31 मार्च को किशनगंज और पूर्णिया समेत कुल छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गयी, जिससे मामले की कई परतें खुलीं. छापेमारी के अगले ही दिन गौतम कुमार को पद से हटा दिया गया और पुलिस मुख्यालय क्लोज कर दिया गया. अब ईओयू की लगातार कार्रवाई से यह साफ है कि जांच अभी लंबी चलेगी और आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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Author: RAVIKANT SINGH

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