-अनचाही गर्भावस्था और मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए अंतरा इंजेक्शन पर जोर
-स्वस्थ, आत्मनिर्भर और जागरूक महिलाओं के निर्माण की दिशा में ठोस पहल
किशनगंज महिलाओं का स्वास्थ्य किसी भी समाज की मजबूत नींव होता है, लेकिन आज भी अनियोजित गर्भधारण, सीमित जागरूकता व गर्भनिरोधक साधनों की कमी के कारण कई महिलाओं को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अनियोजित और बार-बार गर्भधारण मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है. उन्होंने कहा कि सुरक्षित और प्रभावी गर्भनिरोधक उपाय अपनाकर इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसी उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा अंतरा इंजेक्शन को एक प्रभावी परिवार नियोजन साधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, जो तीन महीने तक गर्भधारण से सुरक्षा प्रदान करता है और चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित माना जाता है.सातों प्रखंडों की एएनएम को एकदिवसीय विशेष प्रशिक्षण
जिले के सातों प्रखंडों की 30 एएनएम को अंतरा इंजेक्शन के सबक्यूटेनियस एवं इंट्रामस्क्युलर उपयोग पर एकदिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया गया. यह प्रशिक्षण सदर अस्पताल प्रांगण में आयोजित किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी, जबकि सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने सुरक्षित इंजेक्शन तकनीक, सावधानियों और फॉलो-अप की प्रक्रिया पर मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम में पीएसआई इंडिया, पिरामल फाउंडेशन एवं सिफार के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को लेकर अपने अनुभव साझा किए.सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया कि योजना की सफलता के लिए व्यापक जनजागरूकता जरूरी है. आशा व एएनएम कार्यकर्ता घर-घर जाकर परामर्श देंगी. समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर भ्रांतियों को दूर किया जाएगा.
अंतरा इंजेक्शन: महिलाओं के लिए भरोसेमंद विकल्प
जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने बताया कि हर तीन महीने में केवल एक इंजेक्शन, निःशुल्क सरकारी सुविधा, अनचाही गर्भावस्था रोकने में अत्यंत प्रभावी , महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और परिवार नियोजन पर अधिक नियंत्रण होगा. उन्होंने भरोसा जताया कि इस प्रशिक्षण और समन्वित प्रयासों से अंतरा इंजेक्शन जिले की जरूरतमंद महिलाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा. यह पहल न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर एक स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव भी मजबूत करेगी.
