सीमांचल की वर्षों पुरानी अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारत सरकार के आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) में अधिसूचना प्रकाशित होते ही किशनगंज जिले में हलचल तेज हो गई है. अब यह महत्वाकांक्षी परियोजना केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर उतरने जा रही है, जिसके लिए ठाकुरगंज और पोठिया प्रखंड में भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
रेलवे संशोधन अधिनियम के तहत जारी हुई अधिसूचना
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण संगठन) ने 'रेलवे संशोधन अधिनियम, 2008' की धारा 20क (Section 20A) के तहत यह आधिकारिक अधिसूचना जारी की है.
इसमें स्पष्ट किया गया है कि अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज रेलखंड के दोहरीकरण (Track Doubling) के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहित की जाएगी. यदि किसी प्रभावित रैयत या भू-स्वामी को इस अधिग्रहण से कोई आपत्ति है, तो वे राजपत्र प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों के भीतर अपनी लिखित आपत्ति जिला पदाधिकारी (DM), किशनगंज के समक्ष दर्ज करा सकते हैं.
ठाकुरगंज और पोठिया प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित
राजपत्र के अनुसार, परियोजना की जद में किशनगंज जिले के दो बड़े प्रखंडों के दर्जनों गांव और सैकड़ों प्लॉट शामिल हैं:
- ठाकुरगंज प्रखंड: कनकपुर, उदरागोरी, लूधारा, खरना सहित कई प्रमुख मौजा सीधे तौर पर प्रभावित होंगे.
- पोठिया प्रखंड: बड़ा पोखर, कस्बा कालियागंज, चेचुआबाड़ी, हल्दीबाड़ी, शेखपुरा, सरोगोरा-1, सरोगोरा-2, पातीलाभासा और पावाखाली मौजा की जमीनें चिन्हित की गई हैं.
- कई मामलों में कुछ डिसमिल तो कुछ स्थानों पर आधा एकड़ से लेकर एक एकड़ तक के बड़े भूखंड अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव दर्ज है.
प्लॉट नंबर और क्षेत्रफल का विवरण सार्वजनिक
राजपत्र में पारदर्शिता रखते हुए प्रत्येक मौजा का जे.एल. नंबर, संबंधित प्लॉट नंबर और अधिग्रहित किए जाने वाले सटीक क्षेत्रफल का पूरा विवरण प्रकाशित किया गया है. इससे प्रभावित किसान अपने जमीनी कागजात निकालकर अपनी जमीनों का मिलान कर रहे हैं.
फिलहाल केवल अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी हुआ है; आपत्तियों के निपटारे के बाद मूल्यांकन और मुआवजा (Compensation) निर्धारण की प्रक्रिया अलग से शुरू की जाएगी.
सीमांचल के रेल नेटवर्क को मिलेगी नई संजीवनी
अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज रेलखंड पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का बेहद महत्वपूर्ण रूट है. वर्तमान में सिंगल लाइन (Single Track) होने के कारण ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए घंटों रुकना पड़ता है. दोहरीकरण का काम पूरा होने से:
- नई यात्री ट्रेनों का परिचालन आसान होगा.
- मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.
- सीमांचल का उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर (North East) राज्यों से संपर्क मजबूत होगा.
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन द्वारा आपत्तियों के निस्तारण और निष्पक्ष मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पर टिकी हैं.
