पौआखाली श्मशान घाट पर शवदाह गृह का अभाव, खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार को मजबूर लोग

Pauakhali Crematorium: किशनगंज के पौआखाली श्मशान घाट पर शवदाह गृह और विश्रामालय नहीं होने से लोगों को खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है.

पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट

Pauakhali Crematorium: नगर पंचायत पौआखाली के मीरभिट्ठा पुल के समीप बूढ़ी कनकई नदी किनारे स्थित हिंदू श्मशान घाट पर आज भी शवदाह गृह और विश्रामालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है. भीषण गर्मी हो या बारिश का मौसम, अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को खुले आसमान के नीचे ही पूरी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है. इसे लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शीघ्र स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है.

धूप और बारिश में बढ़ जाती है परिजनों की परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों और श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों को तपती धूप और बारिश के बीच घंटों खड़ा रहना पड़ता है. बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी मौसम की मार झेलने को विवश रहते हैं. कई बार लोगों को पास में मौजूद बालू खदान कर्मियों की अस्थायी झोपड़ियों में शरण लेनी पड़ती है.

वर्षों से उठ रही है शवदाह गृह और विश्रामालय की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि इस श्मशान घाट पर शवदाह गृह और विश्रामालय के निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. उनका कहना है कि विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत आवश्यकता की लगातार अनदेखी की जा रही है.

भूमि अधिग्रहण बना सबसे बड़ी चुनौती

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय निवासी मुकेश राउत और बजरंगी ठाकुर ने कुछ माह पहले विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर शवदाह गृह और विश्रामालय निर्माण की मांग की थी. इसके बाद निर्माण के लिए भूमि की मापी भी कराई गई है. हालांकि नदी किनारे निजी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

सम्मानजनक अंतिम विदाई की उठी मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की अंतिम विदाई सम्मान और गरिमा के साथ होनी चाहिए. इसके लिए श्मशान घाट पर शवदाह गृह, विश्रामालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है. लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है.

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Published by: Shruti Kumari

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