ठाकुरगंज : रात के सन्नाटे में जब अधिकांश लोग घरों में होते हैं, उस दौरान सीमा क्षेत्र की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने की बात सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार, कुछ 16 चक्का वाहनों में उनकी क्षमता से अधिक खनिज लदे होने के बावजूद कम मात्रा का चालान दिखाये जाने की आशंका है. इससे खनिज परिवहन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
800 सीएफटी क्षमता, चालान महज 200 सीएफटी का
सूत्रों के अनुसार, कुछ 16 चक्का वाहनों की क्षमता करीब 800 सीएफटी तक बतायी जा रही है. वहीं, कुछ मामलों में महज 200 सीएफटी का चालान होने की बात सामने आयी है. यानी वाहन में लदे वास्तविक माल और कागज पर दर्ज मात्रा में बड़ा अंतर होने की आशंका जतायी जा रही है.
डाला नीचे तक माल से भरा होने के कारण ऊपर से उसकी वास्तविक मात्रा का आकलन करना मुश्किल होता है. ऐसे में चालान में दर्ज मात्रा और वाहन में लदे माल की वास्तविक स्थिति के मिलान की जरूरत बढ़ जाती है.
भार पर्ची और चालान का मिलान अहम
खनिज परिवहन में भार पर्ची और चालान का मिलान इस मामले की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है. वाहन का वजन होने के बाद भार पर्ची तैयार होती है. इसके बाद सीमा पर जांच के दौरान भार पर्ची में दर्ज वजन और चालान में दर्ज मात्रा का मिलान किया जाये तो ओवरलोडिंग और कम मात्रा के चालान की स्थिति सामने आ सकती है.
सूत्रों का दावा है कि इस प्रक्रिया की नियमित और प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण गड़बड़ी की गुंजाइश बनी रहती है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
सुबह चार से छह बजे के बीच बढ़ती है आवाजाही
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू तड़के का समय बताया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, सुबह चार से छह बजे के बीच पुलिस की ड्यूटी बदलने के दौरान भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है. ऐसे में इस अवधि में सीमा पार करने वाले वाहनों की जांच और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका
निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लादकर वाहन चलाना सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मामला है. ओवरलोड वाहन से दुर्घटना का खतरा बढ़ने के साथ सड़क को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है. वहीं, यदि वास्तविक मात्रा से कम खनिज का चालान काटा जाता है तो इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान हो सकता है.
चालान और सीसीटीवी फुटेज की जांच से खुलेगा राज
ऐसे में सीमा क्षेत्र से तड़के गुजरने वाले वाहनों के चालान, भार पर्ची, खनिज परिवहन से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज की जांच करायी जाये तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है. खासकर सुबह चार से छह बजे के बीच गुजरने वाले 16 चक्का वाहनों का रिकॉर्ड खंगालने से ओवरलोडिंग और चालान में दर्ज मात्रा के अंतर की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है.
