नक्सलबाड़ी में फर्जी कागजात पर गिट्टी लदा डंपर जब्त, सीमांचल में 'एंट्री माफिया' और अवैध खनिज परिवहन पर उठी जांच की मांग

पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोल्डर लदे डंपर की जब्ती ने बिहार-बंगाल सीमा पर चल रहे अवैध खनिज परिवहन के कारोबार का पर्दाफाश किया है. इस घटना के बाद किशनगंज के सीमावर्ती इलाकों में 'एंट्री माफिया' और संगठित नेटवर्क पर व्यापक जांच की मांग जोर पकड़ रही है.

पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी थाना क्षेत्र में कथित फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोल्डर/पत्थर से लदे एक डंपर की जब्ती और चालक की गिरफ्तारी ने बिहार-बंगाल सीमा से होने वाले अवैध खनिज परिवहन के काले कारोबार को उजागर कर दिया है. इस घटना के बाद किशनगंज के ठाकुरगंज और गलगलिया सीमावर्ती इलाकों से गुजरने वाले सैकड़ों खनिज लदे वाहनों के दस्तावेजों और इसमें सक्रिय 'एंट्री माफिया' को लेकर व्यापक जांच की मांग तेज हो गई है.

नियमित जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल

जानकारी के अनुसार, नक्सलबाड़ी पुलिस ने नियमित चेकिंग के दौरान पत्थर लदे डंपर को रोककर उसके दस्तावेजों का सत्यापन किया:

  • फर्जी कागजात: सत्यापन के दौरान रॉयल्टी और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में भारी अनियमितता और फर्जीवाड़ा सामने आया.
  • कार्रवाई: पुलिस ने तत्काल वाहन को जब्त करते हुए चालक को गिरफ्तार कर लिया. अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि फर्जी चालान कहां से और किस नेटवर्क के जरिए तैयार कराया गया था.

बिहार में खनिज परिवहन के लिए ISTP अनिवार्य

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले लघु खनिजों (बालू, गिट्टी, बोल्डर) के परिवहन के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) को पूरी तरह अनिवार्य कर रखा है:

  • सख्त नियम: बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रत्येक खनिज वाहन के पास वैध रॉयल्टी चालान, ई-वे बिल और ISTP होना अनिवार्य है. किसी एक दस्तावेज की कमी होने पर भी वाहन जब्ती और भारी जुर्माना का प्रावधान है.
  • डिजिटल निगरानी: राजस्व चोरी रोकने के लिए गलगलिया बॉर्डर पर जांच सख्त की गई है. ISTP लागू होने के बाद से गलगलिया सीमा पर अब तक 4 हाइवा जब्त किए जा चुके हैं.

'एंट्री माफिया' और संगठित नेटवर्क पर उठे सवाल

नक्सलबाड़ी में डंपर पकड़े जाने के बाद सीमांचल में लंबे समय से चर्चा में रहने वाले तथाकथित "एंट्री माफिया" और बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं:

  • संगठित गिरोह की आशंका: स्थानीय लोगों का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खनिजों का बेरोकटोक सीमा पार होना बिना किसी संगठित सिंडिकेट या बिचौलियों के संभव नहीं है.
  • व्यापक जांच की मांग: खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों ने मांग की है कि जांच केवल एक जब्त वाहन तक सीमित न रहे, बल्कि पिछले कई महीनों में बिहार में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों के ISTP और रॉयल्टी रिकॉर्ड खंगाले जाएं.

संयुक्त विशेष अभियान चलाने की अपील

सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों ने बिहार और पश्चिम बंगाल के खनन विभाग, परिवहन विभाग (RTO), वाणिज्य कर (GST) विभाग तथा पुलिस प्रशासन से संयुक्त रूप से विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है.

नागरिकों का कहना है कि गलगलिया और ठाकुरगंज चेकपोस्ट पर हर छोटे-बड़े खनिज वाहन के कागजात की गहन जांच की जाए और चालकों के साथ-साथ इस अवैध नेटवर्क को चलाने वाले मुख्य आकाओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो.


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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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