दवा दुकानदारों की देशव्यापी हड़ताल, ऑनलाइन बिक्री व भारी छूट के विरोध में प्रदर्शन
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मेडिकल दुकानें रहीं बंद, दवा के लिए भटकते रहे मरीज, इमरजेंसी के लिए खुली रहीं सिर्फ पांच दुकानें
किशनगंज. बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित हड़ताल के समर्थन में बुधवार को जिले की सभी दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं. ऑनलाइन दवा बिक्री, नकली दवाओं के बढ़ते कारोबार और भारी डिस्काउंट की व्यवस्था के खिलाफ दवा कारोबारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. शहर से लेकर प्रखंड मुख्यालयों तक मेडिकल दुकानों पर ताले लटके रहे, जिससे दवा खरीदने पहुंचे आम लोगों और मरीजों के परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि, आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं को ध्यान में रखते हुए शहर में पांच मेडिकल स्टोर खुले रखे गए थे.
ऑनलाइन बिक्री से छोटे दुकानदारों के सामने गहराया आर्थिक संकट
दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण छोटे व मध्यम स्तर के मेडिकल दुकानदारों का व्यवसाय लगातार प्रभावित हो रहा है. उनका आरोप है कि कई ई-फार्मेसी कंपनियां बिना उचित चिकित्सकीय जांच और वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. कारोबारियों ने कहा कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं, बल्कि जीवन रक्षक उत्पाद है, इसलिए इसकी बिक्री पर कड़ी निगरानी आवश्यक है.
छूट के नाम पर नकली दवाओं के प्रसार का आरोप
जिला दवा विक्रेता संघ के सचिव जंगी प्रसाद दास ने बताया कि ऑनलाइन नकली दवाओं का प्रसार भी तेजी से बढ़ रहा है. नकली और घटिया गुणवत्ता की दवाओं से मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, जबकि इसका सीधा नुकसान ईमानदारी से व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को उठाना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से नकली दवा कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग की. दवा दुकानदारों ने बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कुछ कंपनियों द्वारा भारी छूट देकर दवाएं बेचने का भी पुरजोर विरोध किया. उनका कहना है कि अत्यधिक डिस्काउंट के कारण स्थानीय दुकानदार प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं, जिससे कई दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कारोबारियों ने मांग की कि सरकार दवा बिक्री के लिए एक समान नीति लागू करे ताकि सभी को बराबरी का अवसर मिल सके.
ग्रामीण इलाकों में भी दिखा बंदी का व्यापक असर
हड़ताल के दौरान किशनगंज शहर के गांधी चौक, डे मार्केट, कैल्टेक्स चौक, एमजीएम परिसर, अस्पताल रोड सहित सभी प्रमुख इलाकों में मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद दिखाई दीं. इसके अलावा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे दिघलबैंक, ठाकुरगंज, बहादुरगंज, पोठिया और कोचाधामन में भी बंदी का व्यापक असर देखा गया, जहां दवाओं के लिए लोग दिनभर भटकते नजर आए.
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा और तेज : संघ
दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार द्वारा जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा. संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनका कारोबार बचाने की नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा व दवा व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने की भी है. जिला दवा विक्रेता संघ के सचिव जंगी प्रसाद दास ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सरकार ऑनलाइन दवा कारोबार पर रोक नहीं लगाएगी, तो आने वाले समय में और भी तीव्र आंदोलन किया जाएगा.
