अल्पवर्षा व बेमौसम बारिश के बाद अब लूपर का हमला, ठाकुरगंज के चाय बागानों पर दोहरी मार

ठाकुरगंज के चाय उत्पादक किसान इन दिनों लगातार बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अल्पवर्षा, बेमौसम बारिश के बाद अब लूपर कैटरपिलर का प्रकोप बागानों में उत्पादन और गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। किसान वैज्ञानिक मदद की मांग कर रहे हैं।

ठाकुरगंज : ठाकुरगंज के चाय उत्पादक किसान इन दिनों लगातार बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. पहले अल्पवर्षा ने फसल की बढ़वार प्रभावित की, फिर बेमौसम बारिश से बागानों को नुकसान हुआ और अब लूपर कैटरपिलर का बढ़ता प्रकोप किसानों के लिए नई परेशानी बन गया है. नई और कोमल चाय की पत्तियों पर हमला करने वाले इस कीट ने कई बागानों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. इससे बागान मालिक और छोटे चाय उत्पादक कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेने को मजबूर हैं.

नई पत्तियों को पहुंचा रहा नुकसान

चाय उत्पादकों का कहना है कि लूपर कैटरपिलर नई पत्तियों को काटकर खा जाता है, जिससे पत्तियों में बड़े-बड़े छेद हो जाते हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है. नई पत्तियों के नष्ट होने से तुड़ाई का चक्र प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर उत्पादन और चाय की गुणवत्ता पर पड़ रहा है.

बढ़ रही उत्पादन लागत

चाय उत्पादक किसान संजय साह, दिलीप साह और सूरज गुप्ता ने बताया कि पहले भी कीटों का प्रकोप होता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका असर काफी बढ़ गया है. उनके अनुसार मौसम में लगातार बदलाव, अनियमित वर्षा और बढ़ती नमी के कारण कीट तेजी से फैल रहे हैं. महंगे कीटनाशकों का बार-बार छिड़काव करने के बावजूद अपेक्षित नियंत्रण नहीं मिल रहा है, जिससे उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है.

जलवायु परिवर्तन बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार लूपर कैटरपिलर उत्तर भारत के चाय बागानों का प्रमुख नुकसान पहुंचाने वाला कीट है. यह विशेष रूप से चाय की नई और कोमल पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है. एक बार इसका प्रकोप बढ़ने पर कम समय में बड़ी संख्या में पत्तियां नष्ट हो जाती हैं, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और पैदावार घटने लगती है.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी अल्पवर्षा, कभी अत्यधिक बारिश और लंबे समय तक बनी रहने वाली नमी ने कीटों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर दिया है. वहीं अनियमित वर्षा से मिट्टी की उर्वरता और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हुई है.

किसानों ने की वैज्ञानिक मदद की मांग

बागानों में इन दिनों सुबह और शाम पावर स्प्रेयर से कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है. इसके बावजूद किसानों का कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण नहीं किया गया तो नुकसान और बढ़ सकता है.

चाय उत्पादकों ने कृषि विभाग, उद्यान विभाग और चाय बोर्ड से प्रभावित बागानों का सर्वे कराने, वैज्ञानिकों की टीम भेजने तथा लूपर कैटरपिलर के नियंत्रण के लिए प्रभावी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि चाय उद्योग से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है. ऐसे में इस कीट पर शीघ्र नियंत्रण नहीं हुआ तो इसका असर उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी पड़ेगा.

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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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