सीमावर्ती जिले किशनगंज की विशेष भौगोलिक स्थिति के कारण मानसून के दौरान हर साल बाढ़ और जलभराव का खतरा बना रहता है. नेपाल के तराई क्षेत्रों और स्थानीय इलाकों में हो रही बारिश के कारण कंकई, महानंदा, मेची, रतुआ और डोक नदियों के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. पूर्व में राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की सैटेलाइट मैपिंग में भी किशनगंज के कई हिस्सों, विशेषकर बहादुरगंज प्रखंड को बाढ़ प्रभावित संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया जा चुका है.
बहादुरगंज और दिघलबैंक क्षेत्र अधिक संवेदनशील
जिले के बहादुरगंज और दिघलबैंक प्रखंड भौगोलिक दृष्टि से सबसे अधिक निचले और नदियों से घिरे क्षेत्र हैं.
नदियों का जलस्तर बढ़ने पर इन इलाकों में:
- ग्रामीण सड़कों और मुख्य मार्गों का आवागमन बाधित होने की संभावना बनी रहती है.
- दर्जनों गांवों में पानी घुसने और सैकड़ों एकड़ में लगी फसलों के डूबने का खतरा रहता है.
- नदियों द्वारा कटाव (Erosion) की आशंका भी बढ़ जाती है.
घबराने की जरूरत नहीं, सतर्कता है जरूरी
वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और घबराने के बजाय सतर्कता बरतने की आवश्यकता है.
प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशील इलाकों, नदी तटबंधों और निचले हिस्सों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है. तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को नदियों के आसपास न जाने और मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है.
