किशनगंज में घंटों लेट चली ट्रेनें, यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्था पर उठाए सवाल

Kishanganj Train Delay: किशनगंज रेलखंड पर शनिवार को यात्रियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं. कई महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों देरी से चलीं, जिससे स्टेशन पर अफरातफरी और नाराजगी का माहौल बना रहा.

Kishanganj Train Delay: किशनगंज से बच्छराज नखत की रिपोर्ट. किशनगंज में कटिहार रेल मंडल के पांजीपाड़ा–सूरजकमल सेक्शन पर चल रहे ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग कार्य का असर शनिवार को भी रेल परिचालन पर साफ दिखाई दिया. प्री-एनआई और एनआई ब्लॉक के अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों विलंब से चलीं. इससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ लगी रही और लोग लगातार ट्रेन की सही जानकारी पाने के लिए परेशान नजर आए.

प्लेटफॉर्म पर घंटों इंतजार करते रहे यात्री

ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण किशनगंज स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ जुटी रही. कई यात्री घंटों प्लेटफॉर्म पर बैठे ट्रेन का इंतजार करते रहे. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई. यात्रियों का कहना था कि ट्रेन के आगमन समय में लगातार बदलाव हो रहा था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रही.

वैकल्पिक रूट होने के बावजूद नहीं मिली राहत

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर रही कि कटिहार–पूर्णिया–किशनगंज–एनजेपी वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद रेलवे ने उसका प्रभावी उपयोग नहीं किया. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रूट पर सीमित संख्या में ट्रेनें चलती हैं, ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों को अस्थायी रूप से डायवर्ट कर यात्रियों को राहत दी जा सकती थी.

रेलवे की कार्यशैली पर उठे सवाल

यात्रियों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि रेलवे ने तकनीकी कार्यों की तैयारी तो पूरी गंभीरता से की, लेकिन यात्रियों की सुविधा को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई. लोगों का कहना है कि यदि पहले से बेहतर परिचालन योजना बनाई जाती, अतिरिक्त कोच लगाए जाते और वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल किया जाता, तो यात्रियों को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती.

नई सिग्नलिंग व्यवस्था से भविष्य में मिलेगी राहत

रेलवे अधिकारियों के अनुसार पांजीपाड़ा, किशनगंज, हटवार, कानकी और सूरजकमल स्टेशनों पर ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली लागू होने के बाद ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और तेज होगा. इससे कम अंतराल में अधिक ट्रेनों का परिचालन संभव हो सकेगा. हालांकि फिलहाल यात्री यही सवाल उठा रहे हैं कि आधुनिक व्यवस्था लागू करने की कीमत आम लोगों को इतनी भारी परेशानी झेलकर क्यों चुकानी पड़ी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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