बिना ब्याज के पाएं 25 लाख का स्टार्टअप फंड! किशनगंज के युवाओं के लिए बड़ा मौका, जानें कैसे लें इस योजना का लाभ

किशनगंज के युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता का सुनहरा अवसर है. जिलाधिकारी ने स्टार्टअप सेल का दौरा कर नवाचार और बिजनेस आइडिया को बढ़ावा देने पर जोर दिया. जानें कैसे आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.

किशनगंज. जिले में नवाचार, स्वरोजगार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी नवीन कुमार ने स्टार्टअप सेल का विस्तृत दौरा किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टार्टअप सेल की विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया और स्थानीय युवाओं एवं छात्र उद्यमियों के अभिनव बिजनेस आइडिया की जानकारी ली. विशेष सत्र में छात्र उद्यमियों और स्थानीय इनोवेटर्स ने तकनीक, कृषि, सेवा और निर्माण क्षेत्र से जुड़े अपने नए प्रोजेक्ट्स डीएम के समक्ष प्रस्तुत किए. डीएम ने सभी प्रोजेक्ट्स की बारीकियों को समझते हुए उत्पादों की बाजार उपयोगिता, स्केलेबिलिटी और वित्तीय प्रबंधन को लेकर आवश्यक मार्गदर्शन दिया.

सीड फंड प्राप्त स्टार्टअप्स की प्रगति की भी समीक्षा

जिन उद्यमियों को पूर्व में बिहार स्टार्टअप नीति के तहत सीड फंड मिल चुका है, उनके प्रोजेक्ट्स की वर्तमान प्रगति की भी समीक्षा की गई. डीएम ने प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद निर्माण और जमीनी स्तर पर प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की जानकारी ली. फंड प्राप्त स्टार्टअप्स द्वारा तैयार उत्पादों के उत्पादन स्तर, बाजार में मांग और भविष्य की कार्ययोजना का भी मूल्यांकन किया गया. बिहार स्टार्टअप नीति का उद्देश्य नवाचार आधारित और रोजगार सृजन की क्षमता वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करना है.

तकनीक, कृषि, सेवा और निर्माण क्षेत्र के आइडिया किए गए प्रस्तुत

सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं और स्थानीय इनोवेटर्स ने अपने अलग-अलग बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किए. डीएम ने युवाओं को केवल आइडिया तक सीमित नहीं रहने, बल्कि बाजार की जरूरत, लागत, ग्राहकों की मांग और व्यवसाय को बड़े स्तर पर विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने की सलाह दी. उन्होंने वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय की व्यावहारिक उपयोगिता पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही.

बिहार स्टार्टअप नीति का लाभ कौन ले सकता है

बिहार स्टार्टअप नीति 2022 के अनुसार स्टार्टअप का दर्जा पाने के लिए उद्यम को कुछ निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं. इकाई का पंजीकरण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पंजीकृत पार्टनरशिप फर्म या लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप के रूप में होना चाहिए. नीति के अनुसार पंजीकरण या स्थापना के 10 वर्ष तक की अवधि वाली इकाई स्टार्टअप के रूप में पात्र हो सकती है. किसी भी वित्तीय वर्ष में उसका कारोबार 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए. उद्यम का कार्य नवाचार, नए उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा के विकास और सुधार से जुड़ा होना चाहिए. स्केलेबल बिजनेस मॉडल, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की क्षमता रखने वाले उद्यम भी पात्रता के दायरे में आ सकते हैं. इकाई का बिहार में पंजीकृत होना और बिहार में कार्यालय होना भी आवश्यक है.

सामान्य बिजनेस और स्टार्टअप में क्या है अंतर

सिर्फ दुकान या पारंपरिक व्यवसाय शुरू कर देना अपने आप में स्टार्टअप नीति के तहत पात्रता की गारंटी नहीं है. स्टार्टअप में नए उत्पाद, नई सेवा, तकनीकी समाधान, किसी समस्या का अभिनव समाधान या बड़े स्तर पर विस्तार और रोजगार सृजन की क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है. युवाओं को अपने बिजनेस आइडिया को स्पष्ट प्रोजेक्ट और व्यवहारिक मॉडल के रूप में तैयार करना होगा.

आवेदन से पहले तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज

स्टार्टअप के आवेदन के लिए सामान्य रूप से उद्यम से जुड़े पंजीकरण दस्तावेज, संस्थापक और टीम की जानकारी, पहचान एवं संपर्क विवरण, बिहार में कार्यालय का पता और बिजनेस से संबंधित विवरण तैयार रखना उपयोगी होगा.

इसके अलावा बिजनेस आइडिया या प्रोजेक्ट प्रोफाइल, उत्पाद अथवा सेवा की जानकारी, बाजार की संभावना, अनुमानित खर्च, आय की योजना, रोजगार सृजन की संभावना और भविष्य की कार्ययोजना तैयार रखनी चाहिए. यदि उद्यम पहले से कार्य कर रहा है तो कंपनी के वित्तीय दस्तावेज, बैंकिंग से संबंधित जानकारी, कर या अन्य वैधानिक दस्तावेज भी आवेदन अथवा आगे की फंडिंग प्रक्रिया में आवश्यक हो सकते हैं. किसी विशेष सहायता के लिए पोर्टल पर मांगे गए दस्तावेजों की सूची को आवेदन के समय ध्यान से देखना जरूरी है.

स्टार्टअप के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया

सबसे पहले उद्यमी को अपने बिजनेस आइडिया और उद्यम की पात्रता की जांच करनी चाहिए. इसके बाद बिहार सरकार के स्टार्टअप पोर्टल पर उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार आवेदन और स्टार्टअप मान्यता के लिए आवश्यक जानकारी दर्ज की जा सकती है. आवेदन की प्रारंभिक जांच के बाद उद्यमी को अपने बिजनेस मॉडल, उत्पाद, समस्या के समाधान और बाजार की संभावना के संबंध में जानकारी देनी पड़ सकती है. आवश्यक होने पर विशेषज्ञ समिति अथवा संबंधित स्तर पर प्रेजेंटेशन और इंटरैक्शन भी हो सकता है. स्टार्टअप को स्वीकृति और प्रमाणन मिलने के बाद नीति के तहत उपलब्ध सहायता और फंडिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे आवेदन किया जा सकता है. फंड की किस्त और अन्य सहायता के लिए प्रोजेक्ट की प्रगति तथा निर्धारित शर्तों का पालन महत्वपूर्ण होता है.

सीड फंड से लेकर मेंटरशिप तक मिलती है सहायता

बिहार स्टार्टअप पोर्टल पर स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता, मेंटरशिप, इनक्यूबेशन, को-वर्किंग स्पेस, कानूनी एवं बौद्धिक संपदा संबंधी मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध है.

वर्तमान आधिकारिक पोर्टल बिहार स्टार्टअप नीति के तहत पात्र स्टार्टअप्स के लिए 10 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण का उल्लेख करता है. दूसरे चरण की फंडिंग के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार पूर्व में मिली राशि के उपयोग और दस्तावेजों की जांच की जाती है.

महिला और आरक्षित वर्ग के उद्यमियों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन

बिहार स्टार्टअप नीति के तहत महिला उद्यमियों और एससी, एसटी तथा दिव्यांग श्रेणी के उद्यमियों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन के प्रावधान हैं. हालांकि सहायता की राशि और प्रतिशत अलग-अलग फंडिंग अथवा योजना के प्रावधानों के अनुसार लागू होते हैं. इसलिए किसी भी लाभ के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित योजना के नवीनतम दिशा-निर्देश और पात्रता की जांच करना आवश्यक है.

सीड फंड मिलने के बाद भी करनी होगी जवाबदेही

फंड प्राप्त करने वाले स्टार्टअप्स को व्यवसाय की प्रगति और राशि के उपयोग से संबंधित शर्तों का पालन करना होता है. दूसरी किस्त के लिए पहले मिली राशि के उपयोग का प्रमाण और निर्धारित दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. दूसरी किस्त के लिए उपयोगिता रिपोर्ट, स्टेटस रिपोर्ट और खर्च की प्रस्तावित योजना जैसे दस्तावेज निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत करने होते हैं.

छात्र प्रतिनिधियों ने भी निभाई सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम में स्टार्टअप सेल, जिला उद्योग केंद्र तथा जीईसी किशनगंज की ओर से प्रो. प्राचार्य डॉ. भगवान श्री राम, महाप्रबंधक सचिन कुमार, फैकल्टी इंचार्ज प्रो. देवानंद पटेल, जिला समन्वयक मो. माहिन रजा, कुलसचिव प्रो. विकास कुमार, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी प्रो. संदीप अग्रवाल, परीक्षा नियंत्रक प्रो. विकाश चंद दिनकर, परियोजना प्रबंधक धनंजय कुमार और उद्योग विस्तार अधिकारी सुजीत कुमार कामत प्रमुख रूप से सक्रिय रहे.

वहीं छात्र प्रतिनिधियों में निक्की कुमारी, रिशू कुमारी, दीप राज और रौशन राज ने कार्यक्रम के संचालन और समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाई.

युवाओं से अपने आइडिया को कारोबार में बदलने की अपील

जिला प्रशासन ने किशनगंज जिले के युवाओं और तकनीकी छात्रों से सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम का लाभ उठाने की अपील की है. युवाओं से कहा गया कि वे अपने अभिनव विचारों को केवल सोच तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें व्यवहारिक प्रोजेक्ट और उद्यम के रूप में विकसित करें. जिला प्रशासन का मानना है कि स्थानीय स्तर पर नए स्टार्टअप विकसित होने से स्वरोजगार के साथ रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

जानकारी और आवेदन के लिए

स्टार्टअप से जुड़ी पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और नवीनतम दिशा-निर्देश के लिए Startup Bihar के आधिकारिक पोर्टल पर जानकारी ली जा सकती है. किसी भी सहायता राशि या योजना के लाभ के लिए आवेदन करने से पहले नवीनतम आधिकारिक नियमों की जांच जरूरी है.

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By Rahul kumar

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