मानसून की अनुकूल बारिश और किसानों की अनवरत मेहनत के चलते किशनगंज जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की खेती ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है. जिले की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि पर धान की रोपनी का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है. चारों ओर खेतों में फैली धान की हरियाली ने ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदल दी है. समय पर हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और इस बार बंपर पैदावार की उम्मीद मजबूत हुई है.
जुलाई की बारिश ने दी संजीवनी
कृषि विभाग के अनुसार, मानसून की शुरुआत में कुछ दिनों तक किसानों को बारिश का इंतजार जरूर करना पड़ा था, लेकिन जुलाई महीने में हुई पर्याप्त वर्षा ने रोपनी के काम को गति दे दी:
- सभी प्रखंडों में तेजी: जिले के किशनगंज, ठाकुरगंज, बहादुरगंज, दिघलबैंक, टेढ़ागाछ, कोचाधामन और पोठिया समेत सभी सातों प्रखंडों में बड़े पैमाने पर धान की रोपाई पूरी कर ली गई है.
- घटी सिंचाई की लागत: किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मौसम काफी मेहरबान रहा है. प्राकृतिक वर्षा से पानी की उपलब्धता बनी रहने के कारण डीजल पंपसेटों से सिंचाई की जरूरत कम पड़ी, जिससे खेती की लागत में सीधी कमी आई है.
खेतों की देखभाल में जुटे किसान, विशेषज्ञों की सलाह
धान की रोपाई पूरी होने के बाद अब किसान फसल की देखभाल में दिन-रात एक कर रहे हैं:
- देखभाल और खाद का छिड़काव: खेतों में खरपतवार (Weeds) की सफाई और संतुलित मात्रा में उर्वरकों (Fertilizers) का छिड़काव किया जा रहा है.
- कृषि विभाग की अपील: कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने, कीट-रोग (Pests and Diseases) के लक्षणों पर नजर रखने और आवश्यकतानुसार कृषि सलाह केंद्रों से परामर्श लेने की सलाह दी है.
कृषि विभाग का अनुमान: यदि आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज अनुकूल बना रहा, तो इस वर्ष किशनगंज जिले में धान का कुल उत्पादन पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है.
अच्छी फसल और बेहतर बाजार मूल्य की उम्मीद
दूर-दूर तक फैले धान के हरे-भरे खेत न केवल जिले की कृषि समृद्धि को दर्शा रहे हैं, बल्कि किसानों की अटूट मेहनत का प्रमाण भी दे रहे हैं. हालांकि कुछ निचले इलाकों में हल्के जलभराव (Waterlogging) की शिकायतें मिली हैं, लेकिन कुल मिलाकर फसल की स्थिति बेहद संतोषजनक है. अब किसानों की निगाहें अच्छी उपज के साथ-साथ बाजार में फसल के उचित समर्थन मूल्य पर टिकी हैं.
