ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Kishanganj Bypass :ठाकुरगंज में जिस बायपास परियोजना से लोगों को जाम और यातायात की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब संभावित जलजमाव और बाढ़ के खतरे को लेकर विवादों में घिर गई है. मानसून की दस्तक से पहले किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निर्माणाधीन बायपास और बूढ़ीडांगी नदी से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो ठाकुरगंज नगर समेत आसपास के कई गांव जलभराव की गंभीर समस्या का सामना कर सकते हैं.
भाजपा नेता कौशल किशोर यादव के नेतृत्व में किसानों और ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सहयोग शिविर में पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल में नसीम खान, संतोष कुमार यादव, मो. रमजानी, अतिकुर रहमान और हबीबुर्रहमान समेत कई किसान शामिल थे. ज्ञापन में निर्माणाधीन बायपास परियोजना और बूढ़ीडांगी नदी में बढ़ते अतिक्रमण को संभावित संकट का प्रमुख कारण बताया गया है.
क्या बायपास ने रोक दिया नदी का प्राकृतिक प्रवाह?
ग्रामीणों का आरोप है कि पथ निर्माण विभाग द्वारा तैयार किए गए बायपास के एलाइनमेंट ने बूढ़ीडांगी नदी के प्राकृतिक जल निकास क्षेत्र को प्रभावित किया है. उनका कहना है कि बारिश का पानी जिस रास्ते से वर्षों से बहता रहा, वहां अब अवरोध पैदा हो गए हैं. परिणामस्वरूप मानसून शुरू होने से पहले ही कई इलाकों में जलजमाव के संकेत दिखाई देने लगे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन यदि वे प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित करें तो उनका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है.
नदी पहले से बीमार, अब बढ़ा नया संकट
ग्रामीणों के अनुसार बूढ़ीडांगी नदी पहले ही अतिक्रमण, गाद जमाव और जलकुंभी की समस्या से जूझ रही है. ऐसे में बायपास निर्माण के दौरान नदी के प्रवाह क्षेत्र में हुए हस्तक्षेप ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.
किसानों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलजमाव की चपेट में आ सकती है. इससे धान, मक्का, चाय और अनानास जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है.
कलवर्ट पर उठे सवाल, पानी का रास्ता बाधित होने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप मुंशीभिट्ठा कब्रिस्तान के समीप बनाए गए कलवर्ट को लेकर लगाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में उपयोग की गई सेंटिंग संरचना अब तक नहीं हटाई गई है, जिससे पानी के निकास में बाधा उत्पन्न हो रही है.
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इसके अलावा कुछ स्थानों पर नदी की धारा में मिट्टी भरकर उसे संकरा कर दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है. लोगों का कहना है कि नदी की चौड़ाई और जल प्रवाह क्षमता के अनुरूप पुल का निर्माण होना चाहिए था, लेकिन उसकी जगह छोटे कलवर्ट बना दिए गए हैं, जो भारी बारिश के दौरान अपर्याप्त साबित हो सकते हैं.
Kishanganj Bypass: किसानों की मांग, मानसून से पहले हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने प्रशासन से बूढ़ीडांगी नदी को अतिक्रमणमुक्त कराने, गाद और जलकुंभी की सफाई कराने तथा जल निकासी में बाधा बन रहे अवरोधों को हटाने की मांग की है. साथ ही बायपास परियोजना के कारण उत्पन्न संभावित जलभराव के खतरे का तकनीकी सर्वे कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की भी मांग की गई है.
किसानों का कहना है कि यदि मानसून से पहले स्थिति नहीं सुधरी तो ठाकुरगंज नगर और आसपास के गांवों में व्यापक जलभराव, कृषि नुकसान और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है.
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