किशनगंज के गांव में लगा पशु चिकित्सा शिविर, 56 पशुपालकों के 355 पशुओं का हुआ इलाज, मुफ्त मिली दवाएं

किशनगंज के बालूबाड़ी हालामाला में पशु चिकित्सा शिविर लगाया गया, जहाँ 56 पशुपालकों के 355 छोटे-बड़े पशुओं की जांच और उपचार विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क किया गया. शिविर में पशुओं के बेहतर रखरखाव और बीमारी से बचाव की जानकारी भी दी गई.

Kishanganj Animal Treatment Camp: किशनगंज में पशुओं की बीमारी के इलाज के लिए अब पशुपालकों को दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पोठिया प्रखंड के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, अर्राबाड़ी की ओर से शुक्रवार को किशनगंज प्रखंड के बालूबाड़ी हालामाला में पशु चिकित्सा शिविर लगाया गया. शिविर में विशेषज्ञों ने 56 पशुपालकों के 355 छोटे-बड़े पशुओं की जांच और उपचार किया. पशुपालकों को बीमारी से बचाव और पशुओं के बेहतर रखरखाव की जानकारी देने के साथ जरूरी दवाएं भी निःशुल्क दी गयीं.

यह शिविर महाविद्यालय की ओर से आयोजित 115वां किसान संवाद एवं पशु चिकित्सा शिविर था. इसका उद्देश्य पशुपालकों तक उनके गांव में ही चिकित्सा सुविधा पहुंचाना और पशुपालन से जुड़ी समस्याओं को समझकर उनके समाधान का प्रयास करना रहा.

गांव तक पहुंची विशेषज्ञों की टीम, एक साथ 355 पशुओं की जांच

आयोजक सह-प्राध्यापक डॉ राजेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ चंद्रहास के दिशा-निर्देश में किया गया.

शिविर में आसपास के पशुपालक अपने पशुओं को लेकर पहुंचे. विशेषज्ञों ने पशुओं की स्वास्थ्य जांच की और बीमारी के अनुसार उपचार की सलाह दी.

एक ही शिविर में 355 छोटे-बड़े पशुओं की जांच और उपचार से बड़ी संख्या में पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिली. खासकर ऐसे पशुपालकों को इसका लाभ मिला, जिन्हें सामान्य स्थिति में पशुओं के इलाज के लिए दूर स्थित चिकित्सा केंद्र तक जाना पड़ सकता है.

त्वचा से लेकर कृमि और प्रजनन की समस्या तक का इलाज

शिविर में पशुओं में अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आयीं. विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से त्वचा संबंधी बीमारियों, कृमि की समस्या, प्रजनन संबंधी परेशानी और दूध उत्पादन से जुड़ी समस्याओं की जांच की.

जांच के बाद पशुओं की स्थिति के अनुसार उपचार और बीमारी से बचाव के उपाय बताए गये. पशुपालकों को दवाइयों के साथ खनिज तत्व और कृमिनाशक भी निःशुल्क वितरित किये गये.

पशुपालकों को यह भी समझाया गया कि समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार से पशुओं को गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सकता है.

मुफ्त दवा के साथ बताया गया पशुओं को स्वस्थ रखने का तरीका

शिविर का उद्देश्य सिर्फ बीमार पशुओं का इलाज करना नहीं था. पशुपालकों को पशुओं की देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से पालन-पोषण की जानकारी भी दी गयी.

कार्यक्रम समन्वयक डॉ आकृति ने बताया कि किसान संवाद के दौरान पशुपालकों को संतुलित आहार, स्वास्थ्य प्रबंधन, कृमिनाशन और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गयी.

पशुपालकों को बताया गया कि पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य का सीधा असर उनके दूध उत्पादन और पशुपालन से होने वाली आय पर पड़ता है. इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच, उचित आहार और समय पर कृमिनाशन जैसी गतिविधियां जरूरी हैं.

पशुपालकों की समस्या सुनी, समाधान का भरोसा

किसान संवाद कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों से सीधे बातचीत भी की गयी. उनसे पशुपालन में आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी ली गयी और उनके समाधान के लिए जरूरी सुझाव दिये गये.

महाविद्यालय की टीम ने पशुपालक परिवारों से संपर्क कर वैज्ञानिक गतिविधियों और महाविद्यालय में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी भी दी.

इससे ग्रामीण पशुपालकों को विशेषज्ञों से सीधे अपनी समस्या साझा करने और उसका समाधान जानने का अवसर मिला.

पशुओं की सेहत ठीक तो परिवार की आमदनी भी मजबूत

ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुपालन से जुड़ी होती है. ऐसे में पशुओं का बीमार होना परिवार की आय पर भी असर डाल सकता है.

दूध देने वाले पशुओं में बीमारी या पोषण की कमी से दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है. वहीं प्रजनन संबंधी समस्याएं पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती हैं.

ऐसे में गांव में ही पशु चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञों की सलाह मिलना पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. शिविर के माध्यम से इलाज के साथ बीमारी से बचाव की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया.

Kishanganj Animal Treatment Camp: 115वां किसान संवाद, पशुपालकों ने लिया उत्साह से हिस्सा

महाविद्यालय की ओर से आयोजित यह 115वां किसान संवाद एवं पशु चिकित्सा शिविर था. कार्यक्रम में पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया.

शिविर में इलाज और दवा मिलने के साथ पशुपालकों को पशुपालन की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में जानकारी मिली. महाविद्यालय की टीम ने उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और वैज्ञानिक गतिविधियों से भी उन्हें अवगत कराया.

पशुपालकों ने अपनी समस्याओं के समाधान के प्रयास के लिए वैज्ञानिकों और महाविद्यालय की टीम के प्रति आभार जताया.

गांव में आयोजित इस तरह के शिविर से पशुपालकों को एक ही जगह पर जांच, उपचार, दवा और विशेषज्ञ सलाह की सुविधा मिली. इससे ग्रामीण क्षेत्र में पशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

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By अवधेश कुमार

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