कच्चूदह झील कुव्यवस्था का शिकार, प्रवासी पक्षियों का आना हुआ कम

ठाकुरगंज में पिछले कुछ वर्षों के दौरान में प्रवासी पक्षियों का आगमन कम हुआ है

ठाकुरगंज

ठाकुरगंज में पिछले कुछ वर्षों के दौरान में प्रवासी पक्षियों का आगमन कम हुआ है. नवंबर से फरवरी माह तक कच्चुदह, गोथरा समेत ठाकुरगंज इलाके की अन्य झीलों में प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा लगता था. झीलों में पानी की कमी, जलकुम्भी जमा होने व शिकारियों की अत्याचार के कारण अब प्रवासी पक्षियों का आना कम हो चुका है. हाल के वर्षों तक इन झीलों में 15 नवम्बर के बाद से प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ देशी पक्षियों का आना शुरू हो जाता था. लगभग 15 मार्च तक यानी तीन महीने सैलानी पक्षियों से ठाकुरगंज का इलाका गुलजार रहता था. अब स्थिति इस कदर बदल चुके हैं कि प्रवासी पक्षी क्या देसी पक्षी भी बहुत कम संख्या में आते हैं. ठाकुरगंज प्रखंड क्षेत्र के छैतल पंचायत अंतर्गत लगभग दो सौ एकड़ में फैले कच्चुदह एवं ठाकुरगंज के चुरली की गोथरा झील में प्रवासी पक्षी अब नहीं आ रहे हैं.

साइबेरियां पक्षियों का होता था जमावड़ा

नवम्बर से मार्च तक वहां की झीलों में बर्फ जम जाता है. यही वजह है कि रहने व चारा की कमी के कारण साइबेरियन पक्षी इन इलाकों में आते हैं. पर्यावरणविद व जन्तु विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण होने के कारण ही ये प्रवासी पक्षियां यहां आते थे, जो इस क्षेत्र के लिये काफी शुभ संकेत माना जाता है. इन पक्षियों के मल में पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन पाया जाता है, तो मिट्टी और पौधों के लिये काफी लाभदायक होता है. जन्तु विज्ञान के प्रोफेसरों कहना है कि प्रवासी पक्षियां खेतों में पाये जाने वाले हानिकारक कीड़ों को भी नष्ट कर देती है.

पक्षी अभयारण्य की संभावना

स्थानीय लोगों व पर्यावरणविदों का कहना है कि कच्चुदह झील और गोथरा झील में पक्षी अभयारण्य की असीम संभावनाएं हैं. इस झील के सौंदर्यीकरण के बाद यह झील पर्यटन का बड़ा केन्द्र भी बन सकता है.

गोथरा झील को विकसित करने का भेजा गया प्रस्ताव

पर्यटन विभाग के सचिव द्वारा बिहार के सभी जिलों से झीलों के किनारे पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए मांगे गए प्रस्ताव के बाद किशनगंज के डीएम विशाल राज ने ठाकुरगंज स्थित गोथरा झील को हाट व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है. प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में कवायद तेज कर दी गई है.

एनएच 327ई के किनारे अवस्थित है यह झील

अररिया-सिलीगुड़ी मार्ग पर एनएच-327 ई के किनारे स्थित गोथरा झील करीब 12 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है. हाईवे के किनारे होने के कारण यह स्थान आवागमन के लिहाज से काफी सुलभ है, जिससे यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. यदि यह परियोजना साकार होती है तो क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी.

कई सुविधाओं से लेस होगा यह स्थल

पर्यटन विभाग को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार गोथरा झील किनारे बनने वाले हाट में आधुनिक और पारंपरिक सुविधाओं का समावेश होगा. यहां ऑडिटोरियम, बोटिंग की सुविधा, वर्ड सेंचुरी (पक्षी अभयारण्य), भंसा घर (रसोई), प्रदर्शनी स्थल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विशेष स्थान बनाए जाएंगे. इसके साथ ही झील में मखाना की जैविक खेती की योजना भी है, जो इस क्षेत्र को एक नई पहचान देगी.

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Author: ANIMESH KUMAR

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