ठाकुरगंज. सीमांचल व दिल्ली के बीच रेल यात्रा अब आम यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. दिल्ली से किशनगंज आने व किशनगंज से दिल्ली जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में जून-जुलाई तक भारी वेटिंग लिस्ट दर्ज की जा रही है. कई ट्रेनों में रिगरेट की स्थिति बन चुकी है. इससे यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है. रेलवे की ऑनलाइन आरक्षण स्थिति के अनुसार 12423 राजधानी एक्सप्रेस, 20505 राजधानी एक्सप्रेस, 22449 पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, 15483 सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस, 12505 नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, 15909 अवध असम एक्सप्रेस तथा 15671 अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में स्लीपर से लेकर एसी श्रेणियों तक सीटों का भारी संकट देखने को मिल रहा है. राजधानी ट्रेनों में भी नहीं मिल रही सीट राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी हालात सामान्य नहीं हैं. टू-एसी व थ्री-एसी श्रेणियों में जून-जुलाई तक 20 से 60 तक वेटिंग दर्ज की जा रही है. कई तिथियों में टिकट नॉट एवेलेवल व रिग्रेट स्थिति में पहुंच चुके हैं. यात्रियों का कहना है कि जब राजधानी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन में भी सीट नहीं मिल रही, तो सामान्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
नॉर्थ ईस्ट व महानंदा एक्सप्रेस में सबसे ज्यादा दबाव
12505 नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस और 15483 सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिल रही है. स्लीपर श्रेणी में कई दिनों तक 50 से अधिक वेटिंग दर्ज की गयी है. थ्री-एसी व टू-एसी में भी टिकट मिलना कठिन हो गया है. कई दिनों में रिग्रेट की स्थिति बन रही है. महानंदा एक्सप्रेस, जो सीमांचल के यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनों में गिनी जाती है, उसमें भी भारी दबाव है. दिल्ली और एनसीआर में काम करने वाले मजदूर, छात्र, व्यवसायी और नौकरीपेशा लोग बड़ी संख्या में इसी ट्रेन पर निर्भर रहते हैं. संपर्क क्रांति और अवध असम एक्सप्रेस की स्थिति भी खराब 22449 पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस तथा 15909 अवध असम एक्सप्रेस में भी भारी भीड़ बनी हुई है. यात्रियों को महीनों पहले टिकट बुक कराने के बावजूद कन्फर्म सीट नहीं मिल पा रही है. कई यात्रियों को मजबूरी में दलालों, तत्काल टिकट या निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है.दिल्ली से सीमांचल लौटने वालों की भी परेशानी
स्थिति केवल दिल्ली जाने वालों तक सीमित नहीं है. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद व गुरुग्राम जैसे शहरों से सीमांचल लौटने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी की छुट्टियों, शिक्षा, रोजगार, इलाज और पारिवारिक कारणों से बड़ी संख्या में लोग यात्रा कर रहे हैं, लेकिन ट्रेनों की संख्या वर्षों से लगभग स्थिर बनी हुई है.
