पंचायतों में 'जल-जीवन-हरियाली' की खुली पोल, एलआरपी चौक पर शोभा की वस्तु बना सरकारी नलकूप, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे राहगीर

Handpump: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल-जीवन-हरियाली' और सात निश्चय योजना की जमीनी हकीकत किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड में दम तोड़ती दिख रही है. डुमरिया पंचायत के मुख्य एलआरपी चौक पर लगा सरकारी नलकूप महीनों से खराब है, जिससे तपती धूप में प्यास बुझाने के लिए राहगीर और स्थानीय दुकानदार दर-दर भटकने को मजबूर हैं.

पौआखाली (किशनगंज) से रणविजय की रिपोर्ट

Handpump: बिहार सरकार ग्रामीण इलाकों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने और जल स्रोतों को सहेजने के लिए ‘जल-जीवन-हरियाली’ (Jal-Jeevan-Hariyali) अभियान पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. लेकिन सरकारी तंत्र की उदासीनता और रखरखाव के अभाव में ये योजनाएं धरातल पर सफेद हाथी साबित हो रही हैं. ताजा मामला किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरिया पंचायत से सामने आया है. यहाँ के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक केंद्रों में से एक एलआरपी चौक (LRP Chowk) स्थित डाकबंगला के समीप लगा एक मुख्य सरकारी नलकूप महीनों से बंद पड़ा है. लाखों की लागत से बना यह वाटर सोर्स आज प्रशासनिक बेरुखी के कारण सिर्फ एक निर्जीव ढांचा बनकर रह गया है, जिससे स्थानीय जनता में गहरा असंतोष है.

मुख्य मार्ग पर बदहाली: राहगीरों को नसीब नहीं हो रहा एक घूंट पानी

एलआरपी चौक के इस गंभीर पेयजल संकट और इसके चलते उत्पन्न व्यावहारिक दिक्कतों को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • लाइफलाइन रूट पर सूखा: डुमरिया पंचायत का यह एलआरपी चौक मुख्य पथ पर स्थित है, जो सीधे पौआखाली बाजार और जिला मुख्यालय किशनगंज को जोड़ता है. इस व्यस्त मार्ग से होकर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मुसाफिर, छात्र, मरीज और राहगीर पैदल या वाहनों से आते-जाते हैं. जून की इस जानलेवा गर्मी और चिलचिलाती धूप में प्यास से व्याकुल होकर लोग जब डाकबंगला के पास उम्मीद लिए रुकते हैं, तो उन्हें सूखा हैंडल देखकर निराश होकर लौटना पड़ता है.
  • छोटे दुकानदारों की बढ़ी मुसीबत: इस बदहाली की सबसे बड़ी मार चौक के इर्द-गिर्द दुकान चलाने वाले छोटे फुटपाथी दुकानदारों, चाय स्टॉल और फल विक्रेताओं पर पड़ रही है. उनके पास पानी का कोई निजी साधन नहीं है, जिसके चलते उन्हें रोजाना दूर-दराज के निजी चापाकलों या घरों से पानी ढोकर लाने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है.

कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं सात निश्चय के दावे: ग्रामीण

जनता का तीखा आरोप: मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की ‘नल-जल योजना’ और जल संरक्षण की बातें केवल बड़े-बड़े विज्ञापनों और कागजी आंकड़ों तक ही सीमित हैं. जमीनी स्तर पर हकीकत यह है कि जब एक व्यस्त चौराहे का नलकूप महीनों तक ठीक नहीं हो पाता, तो सुदूर वार्डों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. सरकारी संपत्ति केवल लगाने के लिए है, उसके मेंटेनेंस (Rethinking) से अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं है.

अविलंब नलकूप दुरुस्त करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

भीषण उमस और लू के इस दौर में पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए जनता का त्राहिमाम करना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है. स्थानीय सजग नागरिकों ने किशनगंज के जिला पदाधिकारी (DM) और लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग (PHED) के कार्यपालक अभियंता से मांग की है कि इस नलकूप की यांत्रिक गड़बड़ी को चिन्हित कर इसे 24 घंटे के भीतर चालू कराया जाए.

ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस व्यस्ततम चौक पर पेयजल की आपूर्ति अविलंब बहाल नहीं की गई, तो वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर मुख्य पथ को जाम करने और प्रखंड मुख्यालय के घेराव के लिए बाध्य होंगे. देखना होगा कि पीएचईडी का शिकायत दस्ता इस ओर ध्यान देता है या ग्रामीण इसी तरह प्यास से बेहाल रहने को अभिशप्त रहेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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