फरक्का के पास पटरी धंसने की घटना का असर अब तक रेल परिचालन पर दिखाई दे रहा है. सियालदह से सिलीगुड़ी के बीच चलने वाली 13149 कंचनकन्या एक्सप्रेस के डिब्बों का क्रम बदल गया है. इससे यात्रियों को अपने कोच की स्थिति को लेकर परेशानी हो रही है.
इंजन बदलने के दौरान बदली रेक की दिशा
पटरी धंसने वाले दिन सियालदह और हावड़ा की ओर से आने वाली ट्रेनों को तिलडंगा से बल्लालपुर रेलवे स्टेशन लाया गया था. यहां इंजन बदलकर ट्रेनों को न्यू फरक्का जंक्शन के रास्ते मालदा टाउन की ओर भेजा गया. इसी दौरान इंजन का रिवर्सल हुआ और रेक की दिशा बदल गयी.
पहले इंजन के पीछे होते थे स्लीपर कोच
घटना से पहले कंचनकन्या एक्सप्रेस में इंजन के पीछे स्लीपर डिब्बे लगे होते थे. इसके बाद क्रमवार तीन वातानुकूलित इकोनॉमी, तीन वातानुकूलित, प्रथम श्रेणी वातानुकूलित और द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित डिब्बे होते थे. रेक की दिशा बदलने के बाद यह पूरा क्रम उलट गया.
कभी आगे तो कभी पीछे दिखते हैं एसी कोच
अब एक दिन वातानुकूलित डिब्बे इंजन के पीछे दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे दिन वही डिब्बे ट्रेन के पिछले हिस्से में नजर आ सकते हैं. स्लीपर और दूसरे श्रेणी के डिब्बों की स्थिति भी पहले की तुलना में बदल गयी है.
नियमित यात्रियों को हो रही परेशानी
नियमित यात्री सामान्य दिनों में अपने कोच की तय स्थिति के अनुसार प्लेटफॉर्म पर खड़े होते थे. अब रेक की दिशा बदलने के कारण उन्हें पहले से अलग स्थान पर पहुंचना पड़ रहा है. बुजुर्गों, बच्चों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव अधिक परेशानी वाला है.
हर यात्रा से पहले बना रहता है असमंजस
यात्रियों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कंचनकन्या एक्सप्रेस का कौन-सा डिब्बा किस स्थान पर मिलेगा. एक दिन जिस जगह कोच मिलता है, दूसरे दिन उसी स्थान पर पहुंचने पर उसका क्रम बदला हुआ मिल सकता है. ट्रेन का नंबर और मार्ग वही है, लेकिन यात्रियों को हर यात्रा से पहले अपने डिब्बे की स्थिति का अंदाजा लगाना पड़ रहा है.
