सुबह के करीब पांच बजे का वक्त. आसमान से हल्की फुहारें गिर रही थीं, वातावरण में घुप्प अंधेरा और सन्नाटा पसरा था. ठाकुरगंज शहर की अधिकांश आबादी अपने घरों में चैन की नींद सो रही थी, लेकिन ठीक उसी वक्त भीगती सड़क पर एक महिला सफाईकर्मी हाथ में झाड़ू थामे शहर को स्वच्छ बनाने की जद्दोजहद में जुटी थी.
कर्तव्यनिष्ठा की यह मूक तस्वीर जहां एक ओर समर्पण की मिसाल पेश करती है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत प्रशासन और सफाई का ठेका लेने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी के दावों पर कड़े सवाल खड़े करती है.
सुरक्षा किट नदारद: बारिश और अंधेरे में संक्रमण का दोहरा खतरा
बरसात के मौसम में तड़के काम करने वाले सफाईकर्मियों के लिए बुनियादी सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होते हैं:
- मौके से गायब जरूरी संसाधन: काम के दौरान सफाईकर्मियों को पानी से बचाव के लिए वाटरप्रूफ रेनकोट, पैरों में सुरक्षा के लिए गमबूट (ऊंचे रबर के जूते), हाथों में दस्ताने (ग्ल्व्स) और चेहरे पर मास्क मिलना अनिवार्य है.
- जमीनी हकीकत: महिला कर्मी साधारण कपड़ों में भीगते हुए नंगे हाथों से कचरा साफ करती नजर आई.
- हादसों और बीमारियों का जोखिम: सुबह 5 बजे के अंधेरे में सड़क पर कांच के टुकड़े, नुकीले लोहे, संक्रमित कचरे और जहरीले कीड़े-मकोड़ों का खतरा हमेशा बना रहता है. ऐसे में सुरक्षा उपकरणों का न होना सीधे तौर पर उनकी सेहत से खिलवाड़ है.
कागजों पर EPF और ESIC, पर जमीन पर सुरक्षा की निगरानी कौन करेगा?
नगर पंचायत ठाकुरगंज और सफाई संवेदक (एजेंसी) के बीच हुए अनुबंध में नियम-शर्तें बेहद स्पष्ट हैं:
- नियमों का दायरा: समझौते के अनुसार, सभी सफाईकर्मियों का मानदेय सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जाना है तथा उन्हें ईपीएफ (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलना अनिवार्य है.
- अनुबंध की अनदेखी: अनुबंध में कर्मियों को नियमित अंतराल पर सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) उपलब्ध कराने का भी प्रावधान शामिल रहता है.
- प्रशासनिक शिथिलता: बड़ा सवाल यह है कि नगर पंचायत का स्वच्छता शाखा या स्वास्थ्य निरीक्षक इस बात का भौतिक सत्यापन क्यों नहीं करते कि धरातल पर काम कर रहे कर्मियों को ये उपकरण वास्तव में मिले हैं या नहीं.
सिर्फ झाड़ू थमाकर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
जो हाथ हर रोज सुबह उठकर नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए शहर की गंदगी समेटते हैं, उनके स्वयं के स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी आखिरकार किसकी है? क्या सफाईकर्मियों के हिस्से केवल झाड़ू और औपचारिकताएं ही आई हैं?
स्थानीय बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने मांग की है कि नगर पंचायत प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे और ठेका एजेंसी को निर्देशित कर सभी सफाईकर्मियों को रेनकोट, जूते और मेडिकल किट की उपलब्धता सुनिश्चित कराए.
