ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Bihar Education News: बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. शिक्षकों की सेवा पुस्तिका, स्थानांतरण, प्रशिक्षण, वेतन भुगतान और विभागीय निगरानी जैसी प्रक्रियाओं को ई-शिक्षाकोष पोर्टल से जोड़ा जा रहा है. लेकिन ठाकुरगंज प्रखंड से सामने आई एक रिपोर्ट ने इस महत्वाकांक्षी अभियान की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्रखंड के 239 विद्यालयों में कार्यरत 680 शिक्षकों की प्रोफाइल अब भी अधूरी है.
यह आंकड़ा केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि डिजिटल परिवर्तन की राह में मौजूद बड़ी चुनौतियों की ओर संकेत करता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन भुगतान और सेवा रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद हैं, लेकिन ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उनकी डिजिटल पहचान अब तक पूरी नहीं हो पाई है.
प्राथमिक से उच्च माध्यमिक विद्यालय तक फैली समस्या
रिपोर्ट के अनुसार अधूरी प्रोफाइल वाले शिक्षक केवल किसी एक विद्यालय या एक स्तर तक सीमित नहीं हैं. प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक बड़ी संख्या में शिक्षक इस समस्या से प्रभावित हैं. इससे स्पष्ट है कि मामला व्यक्तिगत लापरवाही का नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर मौजूद व्यवस्थागत चुनौतियों का है.
शिक्षा विभाग की योजना है कि प्रत्येक शिक्षक का शैक्षणिक, प्रशासनिक और सेवा संबंधी पूरा रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो. लेकिन जब सैकड़ों शिक्षकों का डाटा अधूरा रह जाता है तो विभाग के डिजिटल मिशन पर सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है.
पुराने दस्तावेज बन रहे बड़ी बाधा
शिक्षक सूत्रों के अनुसार कई शिक्षकों को निवास प्रमाण पत्र, सेवा पुस्तिका और अन्य आवश्यक अभिलेखों के सत्यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. विशेष रूप से उन शिक्षकों की परेशानी अधिक है जिनकी नियुक्ति कई वर्ष या दशकों पहले हुई थी.
उस समय के दस्तावेज और वर्तमान डिजिटल प्रणाली की आवश्यकताओं के बीच काफी अंतर है. कई मामलों में पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल प्रारूप में अपडेट करना आसान नहीं हो रहा है. यही वजह है कि प्रोफाइल अपडेट की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है.
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भविष्य की प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल डाटा एंट्री का मामला नहीं है. आने वाले समय में शिक्षकों से जुड़ी अधिकांश प्रशासनिक प्रक्रियाएं डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित होंगी. यदि बड़ी संख्या में प्रोफाइल अधूरी रहती हैं तो विभागीय योजनाओं की निगरानी, ऑनलाइन सेवा प्रबंधन और डाटा आधारित निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है.
डिजिटल बिहार के सपने की जमीनी चुनौती
ई-शिक्षाकोष की यह स्थिति उस संक्रमण काल को भी दर्शाती है जहां पारंपरिक व्यवस्था और आधुनिक तकनीक के बीच तालमेल बैठाने की चुनौती सामने है. सरकार जहां पूरी शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाना चाहती है, वहीं हजारों शिक्षक पुराने अभिलेखों को नई प्रणाली के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं.
अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग अधूरी प्रोफाइलों को पूरा कराने के लिए विशेष अभियान चलाएगा? क्या दस्तावेज संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाएगी? और क्या शिक्षकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी?
फिलहाल ठाकुरगंज की यह रिपोर्ट केवल 680 अधूरी प्रोफाइलों की कहानी नहीं है, बल्कि यह डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी वास्तविक चुनौतियों की भी तस्वीर पेश करती है.
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