अक्षय तृतीया पर मंदिरों में धर्मगुरुओं के बीच चलाया गया जागरूकता अभियान

अक्षय तृतीया के अवसर पर बुधवार को बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जन निर्माण केंद्र के द्वारा मंदिरों में धर्मगुरुओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया.

किशनगंज. अक्षय तृतीया के अवसर पर बुधवार को बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जन निर्माण केंद्र के द्वारा मंदिरों में धर्मगुरुओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया. अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम को देखते हुए बाल विवाहों की रोकथाम के लिए विभिन्न धर्मों के विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहितों के बीच जाकर अभियान की जानकारी दी गयी. सभी धर्मगुरुओं ने इसकी सराहना करते हुए समर्थन का हाथ बढ़ाया. संगठन ने कहा कि यह देखते हुए कि कोई भी बाल विवाह किसी पंडित, मौलवी या पादरी जैसे पुरोहित के बिना संपन्न नहीं हो सकता, हमने उन्हें बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ने का फैसला किया. बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है. इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है. इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरिज हाल के मालिक को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है.

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By Awadhesh kumar

अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.

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