नोटबंदी से व्यापारी व आमजन परेशान
दिघलबैंक : 1000 व 500 रुपये का नोट बंद होने का साइड इफेक्ट अब तक कायम है. इसका प्रभाव दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर साफ देखा जा सकता है. इसकी वजह बाहर से नोट अभाव में सामान की आपूर्ति न करा पाना बताया जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों के हाट बाजारों में […]
दिघलबैंक : 1000 व 500 रुपये का नोट बंद होने का साइड इफेक्ट अब तक कायम है. इसका प्रभाव दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर साफ देखा जा सकता है. इसकी वजह बाहर से नोट अभाव में सामान की आपूर्ति न करा पाना बताया जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों के हाट बाजारों में थोक व्यापारी के गोदाम से माल नहीं आ रहा है,
खुदरा दुकानदारों की माने तो कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हैं. थोक व्यापारी द्वारा नये नोट की मांग की वजह से हम लोगों ने माल मंगवाना बंद कर दिया है. एक किराना कारोबारी ने बताया कि माल लेकर वाहन नहीं आ रहा है क्योंकि वाहन मालिक को भाड़ा देने के लिए छुट्टा नोट नहीं है, जो बाजार में चल रहे है. साथ ही जिस व्यापारी से सामान मंगवायेंगे, उसे भी वे ही नोट चाहिए. जिन्हें लेने के लिए जनता को सुबह से शाम तक लाइन में लगना पड़ रहा है. ऐसे में जब बाहर से सामान इन हाट बाजारों में आ नहीं रहा तो कुछ असर भी पड़ना तय है.
आधे से अधिक एटीएम पर लटकें है ताले : बैंकों में लगने वाली लाइन में कोई कमी नहीं दिख रही है, प्रखंड के आधे से अधिक एटीएम बंद पड़े हैं. सिर्फ स्टेट बैंक की एटीएम ही काम कर रही है. जबकि अन्य कंपनी के एटीएम काफी समय से बंद है,उपभोक्ताओं का कहना है कि जब इस मुश्किल स्थिति में एटीएम कंपनी अपने एटीएम चालू नहीं के रही है तो फिर सामान्य दिनों में इसका क्या मतलब. ग्रामीण बैंकों की शाखाओं में राशि की अनुपलब्धता है,केवल राष्ट्रीयकृत बैंक ही पैसे मुहैया करवा पा रहे है. लिहाजा आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक के दो सप्ताह बाद भी हालात में कोई ज्यादा सुधार नहीं दिख रहा है. खुदरा पैसों की किल्लत ने अभी भी ग्रामीण इलाकों के हाट बाजारों की रौनक छीन ली है,लोग किसी तरह से गुजारा कर रहें है.