किशनगंज : पुराने पांच सौ एवं हजार रुपये के नोट की वैधता समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले से मध्यम वर्गीय एवं निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों पर दूरगामी परिणाम जो भी हो परंतु वर्तमान परिस्थिति में नोट की किल्लत के कारण लोग सोच-समझ कर पैसे खर्च कर रहे है़ं लंबी लाइन में लग कर नोटों की अदला-बदली करा कर जितने भी रुपये उनके हाथों में आये है उन्हें वे सिर्फ रोजमर्रा के जरूरी एवं आवश्यक वस्तुओं पर ही खर्च कर रहे है़ं
आवश्यक वस्तुओं की खरीद में भी वे कंजूसी बरत रहे हैं, जिसका सीधा असर बाजार पर देखा जा सकता है़ जो लोग सप्ताह में कम से कम चार दिन मांसाहारी खाना खाते थे वे दाल सब्जी से काम चला रहे है़ं शाकाहारी खाने के भी थाली से व्यंजनों के वेरायटी गायब हो गये है़ं आम लोगों को इस बात का अंदेशा रहता है कि पता नहीं पूरी तरह स्थिति सामान्य होने और खुदरा नोटों की किल्लत खत्म होने में कितना समय लग जायेगा़ लाइन में खड़े होकर जितना जद्दोजहद करने के बाद वे रुपये एक्सचेंज करा सके हैं उस रुपये को वे जल्दबाजी में खर्च नहीं करना चाह रहे हैं.
