सोच-समझ कर खुदरा पैसे खर्च कर रहे लोग

किशनगंज : पुराने पांच सौ एवं हजार रुपये के नोट की वैधता समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले से मध्यम वर्गीय एवं निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों पर दूरगामी परिणाम जो भी हो परंतु वर्तमान परिस्थिति में नोट की किल्लत के कारण लोग सोच-समझ कर पैसे खर्च कर रहे है़ं लंबी लाइन में लग कर […]

किशनगंज : पुराने पांच सौ एवं हजार रुपये के नोट की वैधता समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले से मध्यम वर्गीय एवं निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों पर दूरगामी परिणाम जो भी हो परंतु वर्तमान परिस्थिति में नोट की किल्लत के कारण लोग सोच-समझ कर पैसे खर्च कर रहे है़ं लंबी लाइन में लग कर नोटों की अदला-बदली करा कर जितने भी रुपये उनके हाथों में आये है उन्हें वे सिर्फ रोजमर्रा के जरूरी एवं आवश्यक वस्तुओं पर ही खर्च कर रहे है़ं

आवश्यक वस्तुओं की खरीद में भी वे कंजूसी बरत रहे हैं, जिसका सीधा असर बाजार पर देखा जा सकता है़ जो लोग सप्ताह में कम से कम चार दिन मांसाहारी खाना खाते थे वे दाल सब्जी से काम चला रहे है़ं शाकाहारी खाने के भी थाली से व्यंजनों के वेरायटी गायब हो गये है़ं आम लोगों को इस बात का अंदेशा रहता है कि पता नहीं पूरी तरह स्थिति सामान्य होने और खुदरा नोटों की किल्लत खत्म होने में कितना समय लग जायेगा़ लाइन में खड़े होकर जितना जद्दोजहद करने के बाद वे रुपये एक्सचेंज करा सके हैं उस रुपये को वे जल्दबाजी में खर्च नहीं करना चाह रहे हैं.

ठाकुरगंज प्रतिनिधि के अनुसार, भले ही ठाकुरगंज में 2000 के नोट अभी नहीं बांटे जा रहे हैं, लेकिन शहरों से ये नोट लेकर आने वाले लोग खुदरा को लेकर परेशान हो रहे हैं. छोटे नोट की किल्लत झेल रहे इलाके में 2000 का खुदरा नहीं मिल रहा. बुधवार को दिल्ली से आये एक युवक 2000 का नोट लेकर स्टेट बैंक की ठाकुरगंज शाखा में पहुंच गया, जहां उसने अपनी पीड़ा बताते हुए खुदरा दिये जाने की गुहार लगायी. हालांकि वहां भी उसको खुदरा नहीं मिल पाया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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