दिघलबैंक : सीमावर्ती क्षेत्र के लोग इन दिनों हाथियों के आतंक से काफी परेशान है. आये दिन हाथियों का झुंड सीमावर्ती क्षेत्र के गांव में पहुंच यहां के लोगों के कच्चे मकान को तोड़ देते हैं. तो वहीं दूसरी ओर अनाज एवं खेतों में लगे फसल को अपने पैरों से रौंदकर नष्ट कर देते है. इस वर्ष दर्जनों बार हाथियों का झुंड सीमावर्ती क्षेत्र के कई गांव में पहुंचकर दर्जनों कच्चे मकान को नुकसान पहुंचाया तो वहीं कई एकड़ में लगे मकई की फसल को भी रौंद डाला.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद भी वन विभाग ओर स्थानीय प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही. हां कभी कभी वन विभाग के कर्मी क्षेत्र में लोगों से हाल जानने के लिए जरूर आ जाती है, बस. सीमावर्ती क्षेत्र के लोग हमेशा हाथियों के डर से दहशत में जी रहे हैं.
और उनको सुरक्षा का भरोसा देने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है. गनीमत यह है कि लोग रात्रि में खुद ही जग कर अपनी सुरक्षा करते है. बीती रात पांच हाथियों का झुंड सीमावर्ती क्षेत्र के करुवामनी पंचायत के सुरिभिट्टा गांव पहुंच कर एक कच्चे मकान को ध्वस्त करते हुए, फसलों को भी रौंद डाला. स्थानीय वार्ड सदस्य असलम आलम ने बताया कि हाथियों का झुंड रात्रि करीब 12 बजे सुरिभीट्टा गांव पहुंच कर मो आफाक आलम, पिता लतेफुर रहमान के एक घर को तोड़ दिया.
घर टूटने की आवाज सुनने के बाद बगल में सोय लोग जाग गये और हाथियों को देख घबरा कर एक दूसरे को सूचना दिया. बताया जाता है कि करीब आधे घंटे तक हाथी वही जमे रहे. फिर काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों द्वारा टीना बजा कर, अलाव जलाने के बाद हाथी गांव से निकले. गांव में हाथी के पहुंचने की खबर जैसे ही अगल-बगल गांव को मिली सभी लोग रात्रि में ही अपने घर के बगल में अलाव जलाया ताकि हाथियों का झुंड बगल की किसी गांव में ना घुस जाये. बताया जाता है कि सुबह 3 बजे हाथियों का झुंड नेपाल के ओर चले गया.
