टेढ़ागाछवासी आज भी चचरी व नाव के सहारे नदी पार करने को विवश

टेढ़ागाछ : प्रखंड का एक बड़ा इलाका आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी एक अदद पुल को तरस रहा है. कनकई और रतुआ नदियों पर पुल बनाने की आवश्यकता लंबी अवधि से महसूस की जा रही है. टेढ़ागाछ प्रखंड के कनकई नदी में लौचा घाट और रेतुआ नदी में लोधाबाड़ी घाट में पुल […]

टेढ़ागाछ : प्रखंड का एक बड़ा इलाका आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी एक अदद पुल को तरस रहा है. कनकई और रतुआ नदियों पर पुल बनाने की आवश्यकता लंबी अवधि से महसूस की जा रही है. टेढ़ागाछ प्रखंड के कनकई नदी में लौचा घाट और रेतुआ नदी में लोधाबाड़ी घाट में पुल बनाने की मांग काफी पुराना है. सुहिया, हवाकोल, बैगना बीबीगंज के इस इलाके के लोगों को नदी पार जाने के लिए बरसात के समय में नाव व सुखाड़ के समय में चचरी ही सहारा है. नदी में पुल बनाने की मांग काफी दिनों पुराना है.

लेकिन सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इनकी कभी सुध नहीं ली. टेढ़ागाछ प्रखंड और बहादुरगंज को जोड़ने वाली बड़ी आबादी को एक छोटी बड़ी काम के लिए नदी के इस पार या उस पार जाना होता है. रतुआ नदी और कनकई नदी के बीचों बीच बसे एक बड़ी आबादी को प्रखंड मुख्यालय, थाना ब्लॉक आने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है. नाव की सवारी कई बार खतरनाक भी साबित होती है. पुल नहीं होने की वजह से लोग अपने बच्चे को बेहतर स्कूल में नहीं भेज पाते है.

वैसे पुल के अलावा भी इस इलाके की लोगो की कई शिकायतें है स्वास्थ्य, शिक्षा ,पीने का पानी, बिजली और पक्की सड़क के इंतेजाम काफी खराब है. लेकिन लोगों ने पुल बनाने की मांग की साथ अपनी हक की मुहिम शुरू की है. पूर्व प्रमुख आसिफ रहमान का कहना है कि आजादी से अब तक टेढ़ागाछ प्रखंड जिला मुख्यालय से नहीं जुड़ पायी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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