भूख से बिलबिला रहे बच्चे

बाढ़ का तांडव . पीड़ितों का नहीं ले रहा कोई सूध... महानंदा, कनकई, बूढ़ी कनकई, रतुआ, मेची, डोक के जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है. किशनगंज : विस्थापन के पांच दिनों बाद सरकारी राहत व्यवस्था महज एक खानापूर्ति साबित हो रही है. राहत व्यवस्था की चर्चा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 19, 2017 4:35 AM

बाढ़ का तांडव . पीड़ितों का नहीं ले रहा कोई सूध

महानंदा, कनकई, बूढ़ी कनकई, रतुआ, मेची, डोक के जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है.
किशनगंज : विस्थापन के पांच दिनों बाद सरकारी राहत व्यवस्था महज एक खानापूर्ति साबित हो रही है. राहत व्यवस्था की चर्चा होते ही सब एक स्वर से कहते हैं कुछ नहीं मिला. गाछपाड़ा पंचायत के कमारमनी छह घरिया की बाढ़ पीड़ित महिला ताजे नुर व मनतशा ने बताया कि बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं. अभी तक कोई भी सुधि लेने नहीं पहुंचा है.
सबकी अलग अलग समस्या है. भोजन के साथ साथ स्वच्छ पेयजल की समस्या, आसमानी कहर से बचने के लिए पालीथीन सीट, जानवरों के लिए चारा. बासित अली की मानें तो अभी तक कोई पूछने भी नहीं आया है. कमारमनी प्राथमिक विद्यालय और मसजिद में डेरा डाले सैकड़ों परिवारों में सरकारी राहत व्यवस्था के प्रति असंतोष है.
महानंदा नदी से बचाव के लिए कमारमनी गांव के समीप मौजाबाड़ी खाड़ीबस्ती तटबंध पर पानी के दबाव के कारण 600 मीटर तक तटबंध कट गया. जिससे चार दर्जन परिवार का घर नदी में विलीन हो गया. बचाव कार्य नहीं किये जाने से स्थानीय लोगों में असंतोष है. बाढ़ से विस्थापित हजारों परिवार एनएच 31, किशनगंज-बहादुरगंज सड़क, ठाकुरगंज-किशनगंज पथ पर शरण लिए हुए हैं. इसके अलावा एनएच 327 ई के किनारे व अन्य ऊंचे स्थानों पर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं.
महानंदा, कनकई, रतुआ, मेची, डोक नदी की तेज धारा की चपेट में आने से जिला मुख्यालय से कोचाधामन, बहादुरगंज, दिघलबैंक, टेढ़ागाछ को जोड़ने वाली सड़क पर बने पुल का एप्रोच पथ बहने से आवागमन बंद हो गया है. गौरतलब है कि सोमवार की सुबह से ही महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा, जिसके कारण संपर्क सड़क पर पानी का दबाव बढ़ा. स्थानीय लोगों द्वारा प्रशासन को सूचना देने के बावजूद सड़क के कटाव को रोकने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हुआ है.