किसी की फिलॉसफी फेल, तो कोई गणित में हो गया पास

किसी की फिलॉसफी फेल, तो कोई गणित में हो गया पास

खगड़िया. मतगणना स्थल के चारों ओर सुरक्षा घेरे से दूर एनडीए समर्थकों में चुनावी समीकरण के गणित में पास होने की खुशी दिख रही थी, तो अन्य दलों के पिछले एक महीने से चल रहे फिलॉसफी फेल होते जा रहे थे. इसके बावजूद समर्थक आसपास डटे रहे. मालूम हो कि सात मई को मतदान हुआ था. इसके 29वें दिन परिणाम आये. इस बीच सभी दलों के समर्थकों में अपना-अपना चुनावी समीकरण और दावों का दौर चल रहा था. लेकिन मंगलवार को मतगणना के बाद फिलोसफी फेल हो गया.

सुबह से ही चुनाव परिणाम जानने को बेताब थे समर्थक

मंगलवार सुबह से ही प्रत्याशियों से ज्यादा बेताब उसके समर्थक थे. अहले सुबह से ही तमाम समर्थकों का हुजूम अलग-अलग रास्ते से मतगणना स्थल की ओर पहुंच रहे थे. मतगणना स्थल के चारों ओर सुरक्षा के तीन चार अभेद्य लेयर बनाये गये थे. समर्थकों में अधिकांश को पहले बैरियर पर ही रोक दिया गया और उन्हें रंगभूमि मैदान में बने सरकारी टैंट में जाने का इशारा दिया गया. समर्थकों में वे ही जा पाये जो पार्टी के काउंटिंग एजेंट थे. दिन के 10 बजे तक समर्थकों का जत्था मतगणना स्थल के परिसर में प्रवेश करने के लिए जद्दोजहद करता रहा, लेकिन किसी को परमिशन नहीं मिली. हार थककर समर्थकों का दल पुलिस की सुरक्षा घेरे से दूर माइकिंग रेंज में जाकर पेड़ की छांव के नीचे व दुकान पर बैठ गये. दिन के 12 बजे तक कुल मतों के एक चौथाई मतगणना के परिणाम आ चुके थे. समर्थकों का दल मतगणना स्थल से दूर मोबाइल के यूट्यूब व फेसबुक के चैनल पर चला आया. चूंकि मतगणना स्थल पर इन्हें परमिशन नहीं दी गयी तो इन लोगों का रूख बाजार की ओर हो गया. करीब एक बजे दिन में कुछ समर्थक बड़े-बड़े चौपहिया वाहनों से मतगणना स्थल की ओर मंडराते नजर आये, लेकिन उन्हें भी अंदर जाने की कोई जुगत नहीं लगी. वे लोग भी जहां तहां वाहन खड़ी कर सोशल मीडिया के सहारे हो गये.

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