खगड़िया : सदर प्रखंड की माड़र उत्तरी पंचायत में गुरुवार को अमर शहीद प्रभु नारायण सिंह का शहादत दिवस मनाया गया. इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सदर विधायक बबलू कुमार मंडल, सुल्तानगंज विधायक ललित नारायण मंडल, परबत्ता विधायक बाबूलाल शौर्य, सिमरी बख्तियारपुर विधायक संजय कुमार सिंह, समाजसेवी नागेंद्र सिंह त्यागी, सीपीएम नेता संजय सिंह, कांग्रेस नेता चंदन यादव, सुभाष चंद्र जोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता शिवजी महतो सहित सैकड़ों लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. मंच संचालन समाजसेवी राहुल सिंह ने किया. सीएस उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर शहीद को नमन किया.
इससे पहले नगर परिषद क्षेत्र के एनएसी रोड स्थित शहीद प्रभु नारायण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गयी. इसके बाद सीएस उच्च विद्यालय माड़र में छात्र-छात्राओं ने शहादत दिवस मनाया. मुख्य कार्यक्रम शहीद प्रभु नारायण पार्क माड़र में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हुआ.
21 वर्ष की उम्र में दिया सर्वोच्च बलिदान
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि महज 21 वर्ष की उम्र में तिरंगा हाथ में लेकर अंग्रेजों की गोलियों के सामने सीना तान देना प्रभु नारायण सिंह की सबसे बड़ी पहचान बन गयी. उनका बलिदान बताता है कि खगड़िया की मिट्टी ने भी आजादी की लड़ाई में अपना खून दिया था. आजादी के आंदोलन में खगड़िया की धरती ने कई वीर सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से इनकार कर दिया. इन्हीं में अमर शहीद प्रभु नारायण सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है.
वक्ताओं ने बताया कि प्रभु नारायण सिंह का जन्म वर्ष 1921 में माड़र गांव में हुआ था. वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ. नौ अगस्त को आंदोलन के आह्वान के बाद देशभर में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विरोध तेज हो गया. बनारस में पढ़ाई कर रहे प्रभु नारायण सिंह भी आंदोलन से जुड़ गये.
तिरंगा लेकर निकले थे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ
वक्ताओं ने बताया कि प्रभु नारायण सिंह 12 अगस्त 1942 की शाम बनारस से खगड़िया के लिए रवाना हुए. खगड़िया पहुंचने के बाद वे सीधे अपने गांव नहीं गये, बल्कि शहर से सटे सन्हौली पहुंचे और युवा साथियों को तिरंगा लेकर एकत्र किया. उनके नेतृत्व में आंदोलनकारियों का जत्था तिरंगा लेकर अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में खगड़िया की ओर बढ़ा.
जुलूस के आगे प्रभु नारायण सिंह तिरंगा लेकर चल रहे थे. उनका उद्देश्य अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद करना और राष्ट्रीय ध्वज फहराना था. जुलूस जैसे-जैसे आगे बढ़ा, आंदोलनकारियों की संख्या भी बढ़ती गयी. मुंगेरिया चौक के पास अंग्रेज पुलिस का कैंप था. 13 अगस्त 1942 को मुंगेरिया चौक पर प्रभु नारायण सिंह ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया.
सैकड़ों लोगों ने किया नमन
मौके पर सरपंच रामदेव ठाकुर, राम शकल शर्मा, गौतम मंडल, रंजीत मंडल, नरसिंग मंडल, रामदेव साह, विश्वजीत कुमार सिंह, मुखिया प्रतिनिधि सुजीत पासवान, सीएस उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक आनंद कुमार सिंह, अमर ज्योति, राज कुमार सिंह, संवेदना समित्र, रानी सुप्रिया, फरजाना अंजुम, रूबी कुमारी, मिनाल कुमार, पूजा मिश्रा सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे.
