खगड़िया में पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है. नई व्यवस्था का फायदा मिलने के कारण रोजाना जमीन खरीदने वाले लोग निबंधन कार्यालय पहुंचकर इसकी जानकारी ले रहे हैं. बीते एक सप्ताह में करीब तीन दर्जन लोगों ने पेपरलेस रजिस्ट्री करायी है. शनिवार को भी आधा दर्जन लोगों ने इस व्यवस्था के तहत जमीन का निबंधन कराया.
जानकारी की कमी के कारण शुरुआत में धीमी थी रफ्तार
पेपरलेस रजिस्ट्री शुरू होने के बाद जानकारी के अभाव में शुरुआती दिनों में लोगों की संख्या कम रही. हालांकि अब रोजाना आधा दर्जन से अधिक लोग रजिस्ट्री कराने पहुंच रहे हैं. पुराने नियमों के समय जिस गति से दस्तावेजों का निबंधन होता था, फिलहाल व्यवस्था उस रफ्तार तक नहीं पहुंची है. अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले एक सप्ताह में रोजाना 20 से 25 रजिस्ट्री होने लगेंगी.
अलौली के लोग सबसे ज्यादा करा रहे रजिस्ट्री
निबंधन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक लोग अलौली प्रखंड की अलग-अलग पंचायतों से पहुंच रहे हैं. जमीन की खरीद-बिक्री के अलावा मॉरगेज समेत अन्य निबंधन का काम भी पेपरलेस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है. खगड़िया और गोगरी निबंधन कार्यालय को मिलाकर अब तक पांच दर्जन से अधिक पेपरलेस रजिस्ट्री होने की बात बतायी गयी है.
खगड़िया और गोगरी में लगातार बढ़ रहे मामले
जानकारी के अनुसार, खगड़िया निबंधन कार्यालय में शनिवार को तीन दर्जन से अधिक दस्तावेजों का निबंधन हुआ. वहीं गोगरी में करीब दो दर्जन दस्तावेजों का निबंधन किया गया. इसके अलावा कई आवेदकों ने आगे की तारीख के लिए समय भी निर्धारित करा लिया है.
रजिस्ट्री के बाद मोबाइल पर मिलेगा डिजिटल दस्तावेज
अवर निबंधक पदाधिकारी कौशल कुमार झा ने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था में रजिस्ट्री के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित केबाला संबंधित आवेदक के मोबाइल पर भेजा जा रहा है. इससे लोगों को दस्तावेज संभालकर रखने की चिंता कम होगी. विभाग की ओर से दस्तावेज की प्रति भी उपलब्ध करायी जा रही है.
कागज खोने और खराब होने की चिंता होगी खत्म
अधिकारी के अनुसार पेपरलेस रजिस्ट्री से लोगों को कई फायदे मिलेंगे. सबसे बड़ा फायदा यह है कि कागजी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की परेशानी कम होगी. दस्तावेज खोने या खराब होने का डर भी नहीं रहेगा. पक्षकारों की पहचान अधिक पक्की होने से फर्जीवाड़े पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी. जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और राजस्व का भुगतान सरकारी निर्धारित दर के अनुसार ही होगा.
आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी
पेपरलेस निबंधन के लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर होना जरूरी है. इसी नंबर पर विभाग की ओर से ओटीपी भेजा जाता है. जमीन पर पक्षकार की जीपीएस युक्त तस्वीर ली जाती है. खरीदार और विक्रेता दोनों को अपनी पहचान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए खुद निबंधन कार्यालय आना पड़ता है.
ऑनलाइन आवेदन के बाद कार्यालय में पूरी होती है प्रक्रिया
पेपरलेस रजिस्ट्री के लिए सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर खाता बनाना होता है. इसके बाद दस्तावेज का विवरण, पक्षकारों की जानकारी, भूमि का मूल्य और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जाती है. सरकार की निर्धारित दर के अनुसार राजस्व जमा करने के बाद तय समय पर निबंधन कार्यालय पहुंचना होता है.
ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक के बाद होती है रजिस्ट्री
निबंधन कार्यालय में आधार ई-केवाईसी, फोटो, अंगुली के निशान या पुतली के स्कैन और ई-हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इसके बाद रजिस्ट्री पूरी होने पर डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेज मोबाइल पर उपलब्ध हो जाता है. अवर निबंधक पदाधिकारी कौशल कुमार झा ने बताया कि पहले सप्ताह दो, दूसरे सप्ताह छह, तीसरे सप्ताह दस और चौथे सप्ताह करीब दो दर्जन लोगों ने पेपरलेस रजिस्ट्री करायी है.
