खगड़िया से अमित कुमार की रिपोर्ट:
छोटे कारोबारियों का अस्तित्व खतरे में, बिना पर्चे के बिक रही दवाएं: जिलाध्यक्ष
खगड़िया जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार 20 मई को जिले के तमाम दवा कारोबारियों ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रख इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है. मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव रंजन ने बताया कि कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा ऑनलाइन दवा बिक्री को बढ़ावा देने से स्थानीय और छोटे पारंपरिक दवा व्यवसायियों का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में पड़ गया है. इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी वैध डॉक्टरी पर्चे (Prescription) के धड़ल्ले से दवाओं की होम डिलीवरी की जा रही है, जो सीधे तौर पर मद्यनिषेध और स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन है.
शेड्यूल H दवाओं की अवैध बिक्री और नकली दवाओं के प्रसार पर गहरी चिंता
जिलाध्यक्ष राजीव रंजन ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाजार में शेड्यूल एच (Schedule H) और एच1 श्रेणियों की प्रतिबंधित व संवेदनशील दवाओं की अवैध बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. इसके साथ ही नकली दवाओं का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है. बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी-भरकम छूट (डिस्काउंट) देकर पारंपरिक बाजार को पूरी तरह प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है. दवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की मनमानी सीधे तौर पर आम मरीजों की जान से खिलवाड़ है. एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि इन ऑनलाइन कंपनियों पर नकेल कसी जाए, अन्यथा भविष्य में इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा.
राहत: आपातकालीन सेवा के लिए शहर और प्रखंडों में खुली रहेंगी ये दुकानें
दवाइयों की इस पूर्ण बंदी के दौरान जिले के मरीजों को किसी भी तरह की जानलेवा परिस्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए एसोसिएशन द्वारा मानवीय आधार पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. जिला मुख्यालय (शहर) में मुख्य रूप से दो प्रमुख दवा दुकानों को इस हड़ताल से मुक्त रखते हुए चौबीसों घंटे खुला रखने का निर्णय लिया गया है:
- मुस्कान मेडिकल (हॉस्पिटल रोड, खगड़िया)
- न्यू भोला फार्मेसी (राजेंद्र चौक, खगड़िया)
इसके साथ ही जिले के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों में भी इसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है ताकि ग्रामीण इलाकों के गंभीर मरीजों और आपातकालीन स्थिति में लोगों को जीवन रक्षक दवाएं सुलभता से मिल सकें. स्थानीय दवा विक्रेताओं का कहना है कि वे आम जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन अपने रोजगार और मरीजों की सुरक्षा की रक्षा के लिए यह कदम उठाना उनकी मजबूरी बन गया है.
