परबत्ता में बागवानी की मिसाल,25 किस्मों के आमों से गुलजार लालबाबू बगीचा

इस बगीचे में आम की करीब 25 किस्में मौजूद हैं, जिनमें कई विदेशी प्रजातियां भी शामिल हैं. इसके अलावा लीची, कटहल, जामुन, शरीफा, नींबू सहित कई अन्य फलदार पौधे भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.

परबत्ता से पलटु झा की रिपोर्ट:

खगड़िया: प्रखंड के लगार पंचायत अंतर्गत बिसौनी गांव स्थित प्रसिद्ध “लालबाबू बगीचा” इन दिनों लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. प्राकृतिक हरियाली, विविध फलदार पौधों और विदेशी आमों की कई किस्मों ने इस बगीचे को विशेष पहचान दिलाई है.

इस बगीचे में आम की करीब 25 किस्में मौजूद हैं, जिनमें कई विदेशी प्रजातियां भी शामिल हैं. इसके अलावा लीची, कटहल, जामुन, शरीफा, नींबू सहित कई अन्य फलदार पौधे भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.

ग्रामीणों के अनुसार यह बगीचा काफी पुराना है और इसकी ऐतिहासिकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां आज भी करीब 125 वर्ष पुराना विशाल आम का पेड़ मौजूद है, जो कई पीढ़ियों का साक्षी रहा है.

करीब तीन एकड़ में फैले इस बगीचे को नया स्वरूप देने में बिसौनी निवासी कौशल कुमार मिश्र उर्फ पप्पू मिश्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि के बावजूद उन्होंने ग्रामीण परिवेश में रहकर बागवानी और कृषि को अपनी पहचान बनाया.

बताया जाता है कि वर्षों की मेहनत से उन्होंने इस बगीचे को विकसित किया है. आम और लीची की विभिन्न प्रजातियों को वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर उन्होंने बागवानी के क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है. गर्मी के मौसम में जब पेड़ों पर फल लद जाते हैं तो बगीचे की खूबसूरती और बढ़ जाती है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि “लालबाबू बगीचा” केवल फल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक बागवानी का प्रेरणास्रोत भी बन चुका है. यदि इसे पर्यटन या कृषि प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र की बड़ी पहचान बन सकता है.

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Published by: Shruti Kumari

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