Khagaria TB Campaign: खगड़िया जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष स्क्रीनिंग अभियान लगातार चलाया जा रहा है. अभियान के दौरान अब तक करीब तीन लाख लोगों की जांच की जा चुकी है. स्क्रीनिंग में 3,016 लोगों में टीबी के संभावित लक्षण पाए गए, जिनकी बलगम जांच, एक्स-रे और अन्य चिकित्सकीय जांच के बाद 723 लोगों में क्षय रोग (टीबी) की पुष्टि हुई है. सभी मरीजों का इलाज राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत शुरू कर दिया गया है.
घर-घर जाकर की जा रही टीबी की स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के सभी प्रखंडों में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं. जिन लोगों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, वजन कम होना, रात में अधिक पसीना आना या बलगम में खून आने जैसे लक्षण मिल रहे हैं, उन्हें तत्काल सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच के लिए भेजा जा रहा है. अभियान के दौरान लोगों को टीबी से बचाव और समय पर उपचार के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है.
टीबी मरीजों को मिल रही निःशुल्क दवा और पोषण सहायता
टीबी की पुष्टि होने वाले मरीजों को सरकार की ओर से निःशुल्क दवा, नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों की नियमित निगरानी भी कर रही है ताकि वे इलाज बीच में न छोड़ें. अधिकारियों ने बताया कि अधूरा इलाज दवा प्रतिरोधी टीबी का कारण बन सकता है.
डीएम ने 150 मरीजों को वितरित किया फूड बास्केट
गुरुवार को जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 150 टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया. उन्होंने बताया कि जिले के 195 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़े सभी गांवों में सक्रिय स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है ताकि संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर उपचार सुनिश्चित किया जा सके.
सरकार दे रही प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता
Khagaria TB Campaign: राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत प्रत्येक पंजीकृत टीबी मरीज को उपचार अवधि के दौरान प्रतिमाह 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. इसके अलावा जनसहभागिता के माध्यम से मरीजों के पोषण के लिए फूड बास्केट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है. डीएम ने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखने पर जांच कराने में देर न करें और मरीजों को उपचार व पोषण संबंधी सहयोग दें.
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