Khagaria News: बाढ़, आंधी, बिजली गिरना या आग लगना. ऐसी आपदाएं अक्सर बिना चेतावनी के सामने आ जाती हैं. कई बार हादसे इसलिए बड़े हो जाते हैं क्योंकि आसपास मौजूद लोगों को यह नहीं पता होता कि सबसे पहले क्या करना है. इसी सोच के साथ परबत्ता में एक ऐसा प्रशिक्षण शुरू हुआ है, जहां किताबों से नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर लोगों को जान बचाने की तकनीक सिखाई जा रही है.
1 जुलाई से शुरू हुआ 15 दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण
परबत्ता प्रखंड के तेमथा करारी वार्ड संख्या-2 स्थित भगवान घाट पर 1 जुलाई से 15 दिवसीय विशेष आपदा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है. यह शिविर आपदा मित्र, परबत्ता के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है.
प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे से 7:30 बजे तक चल रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग लेकर आपदा प्रबंधन की जरूरी जानकारी हासिल कर सकें.
सिर्फ जानकारी नहीं, व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर
इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं दी जा रही, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में काम आने वाली तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जा रहा है.
प्रशिक्षण में तैराकी और जल बचाव तकनीक, सीपीआर यानी हृदय गति रुकने की स्थिति में प्राथमिक सहायता, प्राथमिक उपचार, सर्पदंश की स्थिति में बचाव और वज्रपात से सुरक्षा के तरीके सिखाए जा रहे हैं.
इसके अलावा बाढ़, आगजनी, आंधी-तूफान और अन्य प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
सामुदायिक सहयोग और सुरक्षित निकासी पर भी फोकस
आपदा के समय केवल खुद को सुरक्षित रखना ही काफी नहीं होता, बल्कि दूसरों की मदद करना भी उतना ही जरूरी होता है. इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण में सुरक्षित निकासी, सामुदायिक सहयोग और आपदा प्रबंधन की बुनियादी रणनीतियों की भी जानकारी दी जा रही है.
आयोजकों का मानना है कि यदि गांव स्तर पर अधिक लोग इस तरह का प्रशिक्षण प्राप्त कर लें, तो किसी भी आपदा के दौरान शुरुआती राहत कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं.
Khagaria News: एनडीएमए और बीएसडीएमए से प्रशिक्षित टीम दे रही प्रशिक्षण
शिविर का संचालन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (बीएसडीएमए) से प्रशिक्षित आपदा मित्र कर रहे हैं.
प्रशिक्षण देने वाली टीम में ऋषि कुमार, सूरज कुमार, रीतेश कुमार, अमृत कुमार, करण कुमार और नितिश कुमार शामिल हैं. प्रशिक्षक प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास भी करा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत और सही निर्णय ले सकें.
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पूरी तरह नि:शुल्क है प्रशिक्षण
आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है. हालांकि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.
इसके बावजूद आयोजकों का कहना है कि इस शिविर का उद्देश्य प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि लोगों को आपदा के समय जीवन बचाने योग्य बनाना है.
युवाओं से की गई भागीदारी की अपील
आयोजकों ने क्षेत्र के युवाओं और आम लोगों से अधिक से अधिक संख्या में प्रशिक्षण शिविर से जुड़ने की अपील की है. उनका कहना है कि मानसून के दौरान बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में यदि स्थानीय लोग पहले से प्रशिक्षित होंगे तो वे न केवल अपनी, बल्कि दूसरों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे.
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