Khagaria News: खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड स्थित कुर्वन पुनर्वास प्राथमिक विद्यालय से सामने आई तस्वीरों ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शिक्षा विभाग भले ही सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा करता हो, लेकिन इस विद्यालय की स्थिति इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई देती है.
करीब 170 नामांकित छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक और शिक्षा सेवक तैनात हैं. इसके बावजूद बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है. जांच के दौरान एक शिक्षक विजय कुमार सदा अपने कक्षा कक्ष में कुर्सी पर सोते हुए मिले. वहीं दूसरी तस्वीर में वे मोबाइल पर रील देखते नजर आए. इस दौरान कक्षा में मौजूद बच्चे बिना किसी शैक्षणिक गतिविधि के बैठे रहे.
तस्वीरों ने खड़े किए कई सवाल
विद्यालय से सामने आई तस्वीरें केवल एक शिक्षक की लापरवाही नहीं दिखातीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाती हैं. जिन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है, वे पढ़ाई की जगह मोबाइल और आराम में व्यस्त दिखाई दिए.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिक्षक ही पढ़ाने के बजाय मोबाइल चलाने में समय बिताएंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी.
स्टाफ पर्याप्त, फिर भी पढ़ाई प्रभावित
विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सहित चार शिक्षक और तीन शिक्षा सेवक कार्यरत हैं. यानी कुल सात कर्मियों के जिम्मे 170 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई है. औसतन प्रत्येक 21 बच्चों पर एक स्टाफ उपलब्ध है.
इतने संसाधन होने के बावजूद यदि कक्षाओं में पढ़ाई नहीं हो रही है तो यह प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़ा करता है.
ग्रामीणों का आरोप, लंबे समय से बनी हुई है यही स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में यह कोई नई घटना नहीं है. उनका आरोप है कि कई शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते, पढ़ाई के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते.
एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजा जाता है, लेकिन वहां शिक्षक ही पढ़ाने के बजाय आराम करते दिखाई देते हैं. ऐसे में सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है.
170 बच्चों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
सरकारी विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा का सबसे बड़ा आधार हैं. ऐसे में यदि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है.
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि विद्यालय में नियमित पढ़ाई शुरू हो सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे.
BEO ने क्या कहा?
प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मनोहर कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित संबंधित शिक्षा सेवकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. उन्होंने कहा कि जांच के बाद नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी जल्दी पूरी होती है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है.
ये भी पढ़ें: पत्नी की याद में पति ने बनवाया 25 लाख का मंदिर, जयपुर से मंगाई प्रतिमा, वैदिक मंत्रों के बीच प्राण प्रतिष्ठा
