Khagaria News: गोगरी प्रखंड के बौरना पंचायत में एक पक्की सड़क ऊपर से मजबूत दिख रही है, लेकिन उसके नीचे की मिट्टी गायब होने से अब यह सड़क खतरे में आ गयी है. दरगाह चौक से मस्जिद तक जाने वाली मुख्य पीसीसी सड़क के किनारे मिट्टी नहीं रहने के कारण सड़क के नीचे गहरी खाई जैसी स्थिति बन गयी है. ग्रामीणों को आशंका है कि भारी वाहनों का दबाव बढ़ते ही सड़क का हिस्सा अचानक टूटकर ध्वस्त हो सकता है.
करीब एक साल पहले लाखों रुपये की लागत से बनी इस सड़क की मौजूदा स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसके बाद की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द मिट्टी भराई नहीं की गयी तो सरकारी राशि से बनी सड़क के क्षतिग्रस्त होने के साथ लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है.
ऊपर पक्की सड़क, नीचे बन गयी खाई
ग्रामीणों के अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से करीब एक वर्ष पहले दरगाह चौक से मस्जिद तक पीसीसी सड़क की ढलाई करायी गयी थी. सड़क बनने के बाद लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी.
लेकिन सड़क के किनारे पर्याप्त मिट्टी नहीं डाले जाने के कारण धीरे-धीरे इसके नीचे की जमीन खाली होती चली गयी. अब कई जगह सड़क के नीचे खाई और गड्ढे जैसी स्थिति बन गयी है.
सड़क का किनारा कमजोर होने के कारण वाहनों का दबाव सीधे सड़क की संरचना पर पड़ रहा है. ग्रामीणों को डर है कि यदि कोई भारी वाहन इस हिस्से से गुजरा तो सड़क का कमजोर हिस्सा अचानक धंस सकता है.
मिट्टी भराई नहीं हुई तो लाखों की सड़क पर संकट
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के बाद उसके दोनों किनारों पर जरूरी मिट्टी भराई नहीं करायी गयी. इसके कारण सड़क और आसपास की जमीन के बीच खाली जगह बनती गयी.
बारिश और पानी के बहाव से स्थिति और गंभीर होने की आशंका है. अगर समय रहते मिट्टी भरकर सड़क के किनारे को मजबूत नहीं किया गया तो सड़क का बड़ा हिस्सा टूट सकता है.
ऐसी स्थिति में न सिर्फ सरकारी राशि से बनी सड़क को नुकसान होगा, बल्कि दोबारा मरम्मत पर भी अतिरिक्त सरकारी खर्च का बोझ पड़ सकता है.
बाढ़ में यही रास्ता बन जाता है गांव की लाइफलाइन
बौरना पंचायत के ग्रामीणों के लिए यह समस्या केवल सड़क टूटने तक सीमित नहीं है. ग्रामीणों के मुताबिक, जब गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश करता है, तब यही मार्ग लोगों के आने-जाने का मुख्य रास्ता बना रहता है.
ऐसे समय में यदि सड़क ध्वस्त हो गयी तो ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ सकती है. जरूरी सामान लाने, बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने और रोजमर्रा के कामों के लिए लोगों को वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर होना पड़ेगा.
इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन सड़क की स्थिति को सामान्य दिनों की समस्या न मानकर बाढ़ के समय की संभावित चुनौती को ध्यान में रखकर तत्काल कार्रवाई करे.
भारी वाहनों से बढ़ रहा खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क से सामान्य आवागमन के साथ भारी वाहनों की आवाजाही भी होती है. सड़क के नीचे की मिट्टी निकल जाने के बाद भारी वाहन गुजरने पर कंपन और दबाव बढ़ता है.
कमजोर हिस्से पर लगातार पड़ रहे इस दबाव से सड़क के धंसने का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अभी समय रहते मिट्टी भराई और किनारे की मजबूती का काम करा दिया जाये तो बड़ी क्षति को रोका जा सकता है.
ग्रामीणों ने डीएम से लगायी गुहार
सड़क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन सड़क के किनारों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी काम नहीं किया गया.
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को स्थल का निरीक्षण कर सड़क के नीचे से मिट्टी गायब होने के कारणों की जांच करनी चाहिए.
साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन हुआ था या नहीं और निर्माण के बाद सड़क की स्थिति की निगरानी क्यों नहीं की गयी.
Khagaria News: समय रहते कार्रवाई हुई तो बच सकती है सड़क
फिलहाल सड़क पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई है. यही वजह है कि ग्रामीणों को उम्मीद है कि समय रहते मिट्टी भराई और जरूरी तकनीकी मरम्मत कराकर इसे सुरक्षित किया जा सकता है.
लेकिन यदि समस्या को नजरअंदाज किया गया तो बारिश, पानी के बहाव और भारी वाहनों का दबाव सड़क के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. खासकर बाढ़ के दौरान सड़क टूटने की स्थिति में इसका सीधा असर बौरना पंचायत के लोगों के आवागमन पर पड़ेगा.
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क का स्थल निरीक्षण कराकर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाये, ताकि सरकारी राशि से बनी सड़क को समय से पहले बर्बाद होने से बचाया जा सके.
